उत्तर प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष और कांग्रेस सदस्यों में नोकझोंक, सुरक्षा को लेकर दलीय नेताओं की होगी बैठक

उत्तर प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष और कांग्रेस सदस्यों में नोकझोंक, सुरक्षा को लेकर दलीय नेताओं की होगी बैठक

लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज सदस्यों की सुरक्षा एवं सदन की गरिमा को लेकर कांग्रेस सदस्यों और अध्यक्ष की नोकझोंक के बीच इस मसले पर दलीय नेताओं की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया।
सदन में गत 12 जुलाई को मिले संदिग्ध पाउडर के बाद सुरक्षा का मामला कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार उर्फ लल्लू उठाना चाहते थे।
प्रश्न प्रहर शुरु होते ही लल्लू द्वारा उठाये गये मसले को अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने तर्कसंगत नियमों में उठाने की सलाह दी, लेकिन लल्लू अपने कथन पर अडे रहे।
दीक्षित के नहीं सुने जाने पर वह अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ सदन के बीचोबीच (वेल) में आ गये। अध्यक्ष ने उन्हें बार बार अपनी सीट पर जाने के लिये कहा, पर वह नहीं माने और बोलना जारी रखा। अध्यक्ष ने कहा कि वेल से कही गयी कोई बात लिखी नहीं जायेगी।
अध्यक्ष का कहना था, "आप सदन स्थगित कराना चाहते हैं लेकिन कार्यवाही नहीं रुकेगी। राज्य के 22 करोड जनता से जुडे प्रश्नों को नहीं होने देना चाहते। इस तरह आपका वेल में खडा होना अनुशासनहीनता है।
आप विधानसभा को चुनौती दे रहे हैं। " कांग्रेस सदस्य और अध्यक्ष की नोकझोंक में हस्तक्षेप करते हुए नेता विपक्ष ने कहा कि यह महत्वपूर्ण मामला है।
विधानसभा की गरिमा और प्रतिष्ठा का मामला है इसे हलके में नहीं लिया जाना चाहिये। इस सदन और विधानभवन के परिसर में आपकी (अध्यक्ष) की मर्जी के बगैर कोई नहीं आ जा सकता। बगैर चर्चा के सरकार ने निर्णय ले लिये। बाइस करोड जनता का सवाल है। विधानसभा अंधेरे में और सरकार उजाले में है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा का कहना था कि दलीय नेताओं की बैठक होनी चाहिये थी। वर्मा के प्रस्ताव पर अध्यक्ष का कहना था कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा कर ली जायेगी।
इस पर राम गोविंद चौधरी ने आपत्ति की और कहा कि विषय गंभीर है इसलिये इस पर अलग से बैठक होनी चाहिये। इससे पहले, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह प्रश्नकाल है। अध्यक्ष की अनुमति से ही औचित्य या अन्य किसी नियमावली के तहत मामले उठाये जा सकते हैं। आपने अनुमति नहीं दी तो मामला नहीं उठाना चाहिये था।
यह पीठ की गरिमा के खिलाफ है। चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्यों को 'भारत माता की जय' के नारे लगाते सुना गया। नोकझोंक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुस्कराते हुए हर चीज सुनते देखा गया।


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