सहारनपुर : सहारनपुर में एक ही विधानसभा क्षेत्र में बढ़त ले सकी भाजपा

सहारनपुर : सहारनपुर में एक ही विधानसभा क्षेत्र में बढ़त ले सकी भाजपा


कैराना सीट पर उम्मीदवार बदलने का फायदा मिला भाजपा को

सहारनपुर (गौरव सिंघल)। उत्तर प्रदेश के पहले नंबर की सहारनपुर लोकसभा सीट पर भाजपा की हार इस मायने में भी अखरने वाली है कि उसके उम्मीदवार राघव लखन पाल शर्मा देवबंद और रामपुर मनिहारान विधानसभा क्षेत्रों, जहां भाजपा के विधायक हैं, में भी गठबंधन के विजयी बसपा उम्मीदवार फजलुर्रहमान से पीछे रहीं। पिछले चुनाव में राघव लखन पाल शर्मा इन दोनों क्षेत्रों में भी विजयी बढ़ंत लेने में सफल रहे थे। जबकि उस दौरान इन दोनों सीटों पर भाजपा विधायकों का कब्जा नहीं था। जाहिर है भाजपा को दोनों विधायकों कुंवर बृजेश रावत और देवेंद्र निम को लेकर जनता में बनी नाराजगी का भी खामियाजा भुगतना पड़ा। पिछले चुनाव में राघव लखन पाल शर्मा बेहट और सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों में भी हारे थे। लेकिन तब सहारनपुर नगर, देवबंद और रामपुर मनिहारान क्षेत्र में मिली बढ़त राघव लखन पाल शर्मा को कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद को पराजित करने में निर्णायक रही थी। सहारनपुर नगर में भाजपा ने अबकी रिकार्ड 1 लाख 35 हजार 840 मत प्राप्त किए। वह बसपा उम्मीदवार से 57 हजार 839 वोटों की भारी बढ़त लेने में सफल रहे थे। इस क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने 55 हजार 69 मत लेकर बसपा प्रत्याशी की हालत खराब कर दी । बसपा प्रत्याशी 78 हजार एक वोट ले सके। राजनीतिक समीक्षकों ने सहारनपुर नगर के रूझान को देखकर मान लिया था कि इस बार राघव लखनपाल शर्मा की जीत का अंतर दोगुना रहेगा। जिसका दावा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किया भी था। लेकिन यह बढ़त भाजपा प्रत्याशी न केवल आसानी से अन्य चार विधानसभा क्षेत्रों में गंवा बैठा बल्कि 22 हजार 417 मतों से पीछे रहकर चुनाव भी हार गया। विजयी बसपा प्रत्याशी को 5 लाख 14 हजार 139 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे राघव लखनपाल शर्मा को 4 लाख 91 हजार 722 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने 2 लाख 7 हजार 68 वोट प्राप्त किए। इमरान मसूद को यह श्रेय जाता है कि उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी भी कांग्रेसी उम्मीदवार से ज्यादा मत प्राप्त किए और मुस्लिमों में अपनी लोकप्रियता और पकड़ काफी हद तक कायम रखी।

सहारनपुर मंडल में भाजपा ने सहारनपुर और बिजनौर लोकसभा सीट हारी। इन दोनों सीटों के भाजपा सांसदों के टिकट बदलने के लिए भाजपा आलाकमान ने जबरदस्त जद्दोजहद की लेकिन आखिर में भाजपा नेतृत्व उनके टिकट बदलने का साहस नहीं जुटा पाया। इसका खामियाजा भाजपा को देश में चली मोदी की 2014 से भी मजबूत लहर के बावजूद सहारनपुर और बिजनौर की सीटें गंवा बैठी। भाजपा नेतृत्व ने यह गलती कैराना लोकसभा क्षेत्र में नहीं की जहां उसने हिम्मत दिखाते हुए उपचुनाव में पराजित हुई अपनी उम्मीदवार मृगांका सिंह का टिकट काट दिया। भाजपा नेतृत्व ने सहारनपुर जिले की गंगोह क्षेत्र के विधायक प्रदीप चौधरी पर दांव लगाया जो सही साबित हुआ। मतदान वाले दिन से ही प्रदीप चौधरी की जीत के लगाए जा रहे कयास भी सही साबित हुए। उन्होंने दो बार की सांसद तबस्सुम हसन को ना केवल तगड़ी टक्कर दी बल्कि उन्हें 90 हजार 41 मतों के भारी अंतर से पराजित कर कैराना भाजपा की झोली मे डाल दी। प्रदीप चैधरी को 5 लाख 64 हजार 380 मत मिले और सपा की तबस्सुम को 4 लाख 74 हजार 339 मत मिले। कांग्रेस के हरेंद्र मलिक पूर्व सांसद को केवल 69 हजार 245 मत ही मिल सके।

समीक्षकों के मुताबिक यदि बिजनौर और सहारनपुर के उम्मीदवारों को ही भाजपा नेतृत्व बदल देता तो जीत की प्रबल संभावना थी। बिजनौर सीट पर भाजपा सांसद भारतेंद्र सिंह गठबंधन के बसपा प्रत्याशी मलूक नागर से 70 हजार से ज्यादा वोटो से हारे। मलूक नागर को 5 लाख 56 हजार 556 वोट मिले जबकि भाजपा के मौजूदा सांसद और उम्मीदवार भारतेंद्र सिंह को 4 लाख 86 हजार 362 वोट ही मिल पाए। कांग्रेस के नसीमुद्दीन सिद्दिकी द्वारा लिए गए 25 हजार 608 वोटों के बावजूद बसपा जीत के मायने हैं। जाहिर है सहारनपुर और बिजनौर की सीटें भाजपा को उम्मीदवारों की नाराजगी के कारण भी गंवानी पड़ी।

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