मेरठ: पुलिस उत्पीड़न से तंग सेवानिवृत्त दारोगा ने दी जान

मेरठ: पुलिस उत्पीड़न से तंग सेवानिवृत्त दारोगा ने दी जान


मेरठ। 40 साल तक पुलिस विभाग में सेवाएं देने वाले एक सेवानिवृत्त दारोगा को अपने ही विभाग से दुत्कार मिली तो हताश होकर उसने मौत को गले लगा लिया। उसकी मौत के 2 दिन बाद परिवार के लोगों को सुसाइड नोट बरामद हुआ तो उन्हें मृतक की मानसिक स्थिति की जानकारी हुई। अधिकारियों के पास कई दिन से लगातार टीपी नगर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर चक्कर काट रहे पीड़ित परिजन शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक अपराध से मिले। एसपी क्राइम डॉक्टर बीपी अशोक ने पूरे मामले की जांच सीओ ब्रह्मपुरी को सौंपी है।

टीपीनगर क्षेत्र निवासी चंद्रपाल यूपी पुलिस में दारोगा थे। उनकी पुत्री अंजलि की शादी यूपी पुलिस में कार्यरत शामली में तैनात कांस्टेबल मोतीलाल के साथ हुई थी। मोतीलाल के साथ ही तैनात टीपीनगर निवासी कांस्टेबल आशीष उनकी पुत्री अंजलि को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इस मामले में परिजनों ने आशीष के खिलाफ टीपीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। थाने में तैनात एसएसआई प्रमोद गौतम और अन्य कुछ पुलिसकर्मियों ने अंजलि के भाई व पिता को दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया। इसके बाद चंद्रपाल के परिवार पर टीपी नगर पुलिस ने आरोपितों से समझौते का दबाव बनाया। इससे आहत होकर 18 अप्रैल को चंद्रपाल ने जहर खाकर जान दे दी। चंद्रपाल के पुत्र गोविंद ने बताया कि पिता की मौत के दो दिन बाद उसे उनके कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ जिसमें चंद्रपाल ने अपनी मौत के लिए एसएसआई प्रमोद गौतम और अन्य कुछ पुलिसकर्मियों सहित आरोपी कांस्टेबल आशीष को जिम्मेदार ठहराया था।

परिजनों का कहना है कि वह लगातार अधिकारियों की चौखट पर चक्कर काटकर थाना पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मगर अपने ही विभाग से मदद ना मिलती देख अब उनका मनोबल गिरता जा रहा है। आज पीड़ितों ने एसपी क्राइम डॉक्टर बीपी अशोक से मिलकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया जिसके बाद एसपी क्राइम ने सीओ ब्रह्मपुरी को मामले की जांच सौंपी है।


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