बसपा से बगावत करके मेनका के साथ चुनावी सभाएं कर रहे पवन पाण्डेय, वरुण के खिलाफ लड़े थे 2014 का लोकसभा चुनाव

बसपा से बगावत करके मेनका के साथ चुनावी सभाएं कर रहे पवन पाण्डेय, वरुण के खिलाफ लड़े थे 2014 का लोकसभा चुनाव




-पिछली बार वरूण के साथ रहे चंद्रभद्र इस बार बसपा से मेनका के खिलाफ

लखनऊ। पिछले लोक सभा चुनाव में वरूण गांधी के खिलाफ बसपा से चुनाव लड़ चुके पवन पांडेय इस बार उनकी मां मेनका गांधी का चुनाव प्रचार कर रहे हैं।उन्होंने अब तक बसपा से इस्तीफ़ा भी नहीं दिया है लेकिन इसके बावजूद न तो भाजपा को कोई आपत्ति है और न ही गठबंधन में शामिल बसपा ने अभी तक कोई कार्रवाई की है। पवन पांडेय ने अपने समर्थकों को बुलाकर गठबंधन उम्मीदवार का विरोध करने की घोषणा की। इसके बाद मेनका गांधी की जगह-जगह होने वाली नुक्कड़ सभाओं में शामिल होने लगे। यह भी दिलचस्प है कि पिछली बार वरूण गांधी के साथ रहे चंद्रभद्र सिंह इस बार उनकी ही मां मेनका के खिलाफ बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं।

बसपा नेता पवन पांडेय ने 'हिन्दुस्थान समाचार' को बताया कि हम अब भी बसपा में हैं लेकिन हम किसी अपराधी का चुनाव प्रचार नहीं कर सकते हैं। इस कारण हमने विकास का रास्ता चुना है और मेनका गांधी का चुनाव प्रचार में साथ दे रहे हैं। गठबंधन से सुल्तानपुर में बसपा ने चंद्रभद्र सिंह ऊर्फ सोनू सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। उन पर व उनके छोटे भाई यशभद्र सिंह ऊर्फ मोनू सिंह पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये दोनों भाई पिछली बार वरूण गांधी के साथ थे और हर चुनावी सभा में साथ रहते थे। वरूण गांधी ने चुनाव के बाद सुल्तानपुर विधानसभा का अपना प्रतिनिधि भी चंद्रभद्र को बनाया था।

भाजपा के स्थानीय नेताओं के अनुसार वरूण गांधी ने चंद्रभद्र को भाजपा से विधानसभा का टिकट दिलवाने का आश्वासन दिया था लेकिन विधानसभा के टिकट बंटवारे में उनकी नहीं चली। सुल्तानपुर में अपनी कर्मभूमि बना चुके अकबरपुर के पवन पांडेय की अदावत चंद्रभद्र सिंह से बहुत पुरानी है। दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते। ऐसे में पहले तो पवन पांडेय अपने घर पर बैठे रहे लेकिन कुछ दिन पूर्व उन्होंने समर्थकों की एक बैठक बुलाई और मेनका गांधी का समर्थन करने का फैसला ले लिया। इसके बाद से वहां का चुनाव प्रचार भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

पवन पांडेय पिछले दो सप्ताह से बगावत करके केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इसके बावजूद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल का कहना है कि उनके विपक्षी नेता के चुनाव प्रचार करने के सम्बंध में उन्हें जानकारी नहीं है।


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