वोट के लिये बजरंगबली के नाम का इस्तेमाल करने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती को हनुमानजी ही करेंगे ठीक : रामशंकर

वोट के लिये बजरंगबली के नाम का इस्तेमाल करने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती को हनुमानजी ही करेंगे ठीक  : रामशंकर


इटावा। लोकसभा चुनाव में जीत के लिये अली और बजरंगबली के नाम का धड़ल्ले से हो रहे इस्तेमाल के बीच अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी रामशंकर कठेरिया ने कहा कि वोट के लिये बजरंगबली के नाम का इस्तेमाल करने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती को हनुमानजी ही ठीक करेंगे।

इटावा संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार कठेरिया ने कहा " वोटों के समय मायावती बजरंगबली का नाम ले रही है, मुझे लगता है बजरंगबली मायावती को ठीक कर देंगे। "

उन्होने कहा कि पिछले पांच सालो के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल मे विकास का जो मॉडल बनाया है उसके चलते यह उम्मीद है कि देश की जनता एक बार फिर से उनको ना केवल प्रधानमंत्री बनाएगी बल्कि भाजपा की फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में काबिज होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुशासन, राष्ट्रवाद और विकास की दिशा में काम किया है उससे देशवासियों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ । महंगाई,भ्रष्टाचार और आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो मुहिम शुरू की है उस मुहिम को लंबे समय तक देश में संचालित किए जाने की बेहद आवश्यकता है और यह मुहिम तभी संचालित हो सकती है जब एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र मे काबिज हो और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित हो।

भाजपा नेता ने कहा कि दुनिया में भारत की पहचान बने और दुनिया में भारत का मान सम्मान बढ़े इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो काम किया है वह अतुलनीय है। श्री मोदी ने गांव के गरीबों के लिए कई किस्म की योजनाएं चलाई है । इन योजनाओं से गांव वालों में खासा उत्साह देखा जा रहा है । चाहे स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय योजना या फिर उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन प्रदत्त करने की योजना,इसके साथ ही किसी भी बीमार के लिए आयुष्मान योजना जिससे गॉव देहात में मोदी के चाहने वालो की तादात बढ़ी है । किसानों को ऋण मुक्त करने की योजना हो उससे भी लोगो मे उनकी लोकप्रियता बढ़ी हुई है ।

उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन केवल नेताओं के आपसी तालमेल का गठबंधन है । इस गठबंधन से आम मतदाता का कोई लेना देना नहीं है । चुनाव के बाद दोनों दल के प्रमुख एक दूसरे के खिलाफ मुखर होते हुए नजर आएंगे । भले ही आंकड़े उनके पक्ष में बताए जा रहे हो लेकिन ऐसा हकीकत में नहीं है क्योंकि दोनों दल पहले ही पूरे प्रदेश भर में आधी आधी सीटो पर संसदीय चुनाव लड़ रही हैं ।

कठेरिया ने कहा कि सपा बसपा गठबंधन कोई मायने नहीं रखता है क्योंकि एक दूसरे संगठन के लोग एक दूसरे को हराने में जुटे हुए ऐसी खबरें उनके पास में आ रही है उनकी सभाओं में भीड़ भी नहीं मिट रही है केवल जाति सम्मेलन के बल पर वो अपने आप को आगे बताने में जुटे हुए हैं जबकि हकीकत में दोनो दल भाजपा के मुकाबले कही भी नही टिक रहे हैं ।

दोनो दल के मुखिया अपने अपने दलों के समर्थकों को तरह तरह का प्रलोभन देकर के गुमराह करते रहते हैं लेकिन अब लोग काफी जागरूक हो चुके हैं और इस जागरूकता का असर 2014 के संसदीय चुनाव में तो दिखाई ही दिया है । 2017 के विधानसभा चुनाव में भी नजर आया तभी समाजवादी पार्टी मात्र पांच सीट पर सिमट करके रह गई जबकि बसपा जीरो पर आकर के टिक गई है । रही बात विधानसभा में तो उनकी दोनों दलों की विधायक संख्या भी इतनी कम हो चुकी है कि जो कहीं पर भी मुकाबले में खड़े होते हुए नहीं दिखाई दे रहे है ।

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