कांग्रेस के संजय सिंह, गठबंधन के चंदभद्र सिंह के बीच दहाड़तीं मेनका गांधी

कांग्रेस के संजय सिंह, गठबंधन के चंदभद्र सिंह के बीच दहाड़तीं मेनका गांधी


सुल्तानपुर। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे सुल्तानपुर लोकसभा सीट के पार्टी उम्मीदवारों की धड़कन बढ़ती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार एवं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, कांग्रेस से डॉ. संजय सिंह, सपा-बसपा गठबंधन से चंद्र भद्र उर्फ सोनू सिंह त्रिकोणीय संघर्ष में जनता के बीच अपनी-अपनी जीत का दावा ठोंक रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार एवं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी अपनी जीत पक्की मान रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पुनः प्रधानमंत्री के रूप में देखने की घोषणा भी कर दी है। दूसरी तरफ कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. संजय सिंह अपने को स्थानीय बताकर अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। गठबंधन के प्रत्याशी चंद्र भद्र उर्फ सोनू सिंह भी खुद को स्थानीय बताते हुए सुल्तानपुर के विकास के लिए अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार मेनका गांधी लगातार सुबह से देर रात 10:00 बजे तक जनता के बीच अपनी पकड़ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। पिछले दिनों एक जनसभा में विवादित बयान को लेकर एक धर्म के प्रति धमकाने का मामला मीडिया में जमकर उछला था तो उस पर मेनका गांधी ने कहा कि मैंने तो सिर्फ इतना ही कहा था कि सुल्तानपुर से मैं जीत रही हूं। मेरी पार्टी जीत रही है, अब आपको तय करना है कि आपकी सहभागिता कितनी होगी। मोदी सरकार ने किसी जाति धर्म को देखकर योजनाएं लागू नहीं की हैं।

संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी पिछले 7 बार से पीलीभीत से सांसद रही हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर से वरुण गांधी विजयी हुए थे। वरुण गांधी ने अपने कार्यकाल में सांसद निधि से जिला अस्पताल में बच्चों के लिए अलग से एक विंग बनवाया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने वेतन से गरीबों के लिए आवास भी बनवाए हैं। 1980 के दशक में डॉ. संजय सिंह गांधी परिवार के बेहद करीबी थे। पार्टी में उचित स्थान न मिलने के कारण वह 1988 के दशक में जनता दल में शामिल हो गए। एक दशक बाद 1998 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर अमेठी लोकसभा सीट से कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव लड़े, जिसमें उन्होंने 205025 वोट से जीत भी हासिल की। उस समय अमेठी से कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा 181755 वोट पाकर दूसरे स्थान पर थे।

इस चुनाव में वह अपने पूर्व मित्र की पत्नी के सामने मैदान में हैं। डॉ. संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार थी। चुनाव परिणाम में अमिता सिंह को चौथे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा था। जब से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका वाड्रा चुनाव प्रचार में उतरी हैं, तब से कांग्रेसियों का मानना है कि सुल्तानपुर की नैया भी उनके सहारे पार हो जाएगी। सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी चंद्र भद्र सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वरुण गांधी के प्रतिनिधि के रूप में थे। इस बार टिकट न मिलने से नाराज चंद्र भद्र सिंह बहुजन समाज पार्टी में चले गए। इसके पहले भी वह कई पार्टियों में इधर से उधर आ-जा चुके हैं। वह गठबंधन उम्मीदवार के रूप में अपने को स्थानीय बताते हुए एवं सुल्तानपुर के विकास के लिए अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। जिले में जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार 18 लाख 11 हजार 770 मतदाता बनाए गए हैं। इसमें 9 लाख 47 हजार 618 पुरुष व 8 लाख 64 हजार 59 महिला मतदाता हैं। इन मतदाताओं के बीच तीनों पार्टियों के उम्मीदवार अपनी लोक लुभावने वादे लेकर जनता के बीच इस कड़ी धूप में हाथ जोड़े खड़े दिखाई दे रहे हैं। दोनों उम्मीदवारों के मुकाबले मेनका दहाड़ती नजर आ रही हैं।

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