ईरान की सेना को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल करना तानाशाही फैसला: कल्बे जवाद

ईरान की सेना को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल करना तानाशाही फैसला: कल्बे जवाद



लखनऊ। मजलिसे उलमाए हिन्द के जनरल सेक्रेटरी मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि अमेरिका के जरिए ईरान की सेना ''सिपाहे पासदाराने इन्केलाब'' को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया जाना निंदनीय है। अमेरिका का फैसला नाइंसाफी और तानाशाही पर आधारित है।

मौलाना ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका का ये फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उलंघन है। इस पर सयुंक्त राष्ट्र और इंसाफ पसन्द देशों को अमेरिका के खिलाफ ठोस कदम उठाना चाहिए क्योंकि पहली बार किसी देश की सेना को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया गया है। सिपाहे पासदाराने इन्केलाब अपने देश और सीमाओं की सुरक्षा के लिए लगातार कुर्बानियां देती रही है, क्या ऐसी सेना को आतंकवादी संघठन कहना सही है? उन्होंने कहा कि हम अमेरिका के इस फैसले की निंदा करते हैं।

मौलाना जवाद ने कहा कि अमेरिका इजराइल और सऊदी अरब की सेना लगातार दूसरे देशों में आतंकवाद को बढ़ावा दे रही हैं और आतंकवादी संघठनो की सरपरस्ती कर रही हैं। क्या अमेरिका अपनी और इजराइल की सेना को भी आतंकवादियों की सूची में शामिल करेगा? मौलाना ने कहा कि अमेरिका खुद आतंकवादी और आतंकवादियों का सरपरस्त है, इसलिए वह दूसरों को आतंकवादी कह कर अपने आतंकवाद को छुपाने का असफल प्रयास कर रहा है।

मौलाना ने कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प जब से सत्ता में आये हैं दिन प्रतिदिन अंतरराष्ट्रीय स्थिति खराब होती जा रही है। ट्रम्प का ये शत्रुतापूर्ण फैसला मध्यपूर्व को अस्थिर कर देगा और उसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि ट्रम्प का फैसला ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की कोशिशों का हिस्सा है लेकिन ट्रम्प को नहीं मालूम कि ईरान लगातार ऐसे शत्रुतापूर्ण प्रतिबंधों और नाइंसाफी वाले फैसलों के विरुद्ध एक लंबे समय से सफलता के साथ लड़ता चला आ रहा है और आगे भी वह इस्तेमारी ताकतों के विरुद्ध इसी तरह लड़ता रहेगा।


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