उप्र की 80 सीटों पर जीत जाएं तो कोई आश्यर्चजनक नहीं..!

उप्र की 80 सीटों पर जीत जाएं तो कोई आश्यर्चजनक नहीं..!



लखनऊ। लोकसभा चुनाव-2019 के मद्देनजर यूपी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनावी रणनीति क्या है, बूथ प्रबंधन कैसा और कितना मजबूत है। यूपी के 80 लोकसभा सीटों में कितने पर बीजेपी जीतेगी। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा प्रदेश लोकसभा चुनाव प्रभारी जेपीएस राठौर का दावा है कि उप्र की 80 सीटों पर भाजपा जीत दर्ज करे तो कोई आश्यर्चजनक नहीं होगी। वहीं, उन्होंने राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह गंभीर व्यक्ति नहीं हैं। पेश है बातचीत के अंश:—

प्रश्न - 2014 में एनडीए उत्तर प्रदेश की 73 सीटों पर जीत दर्ज की, इस बार क्या उम्मीद है?

उत्तर : प्रदेश में भाजपा का माहौल जिस प्रकार से बना हुआ है कोई आश्चर्य नहीं होगा 80 की 80 सीटे हम जीत जाएं। लेकिन इतना निश्चित है कि पिछली बार से बेहतर परिणाम आएगा। 73 से 74 सीट होंगी या 80 तक जा सकती है। गठबंधन की हवा निकल गई है। कांग्रेस का नाम लेने वाला कोई नहीं है। अमेठी की सीट बहुत बड़े अंतर से राहुल गांधी हार रहे हैं। मोदी-योगी के कार्यों से प्रदेश में ऐतिहासिक बदलाव आया है, इसका लाभ मिलने वाला है।

प्रश्न - कैराना के उपचुनाव में गठबंधन ने भाजपा को मात दिया था, इस बार कितनी बड़ी चुनौती है भाजपा के लिए महागठबंधन?

उत्तर : उस समय भी आरएलडी गठबंधन का हिस्सा थी और आरएलडी के साथ-साथ कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा थी। एक बात आपको स्पष्ट कर दें जब उपचुनाव होता है तो प्रधानमंत्री बनाने के लिए चुनाव नहीं होता। यह चुनाव प्रधानमंत्री बनाने के लिए है। कैराना की जनता ने हुकुम सिंह को जिताया था तो नरेंद्र मोदी को जिताया था। ठीक उसी प्रकार जनता भाजपा के उम्मीदवार को जिताने के लिए बेसब्र है। महागठबंधन भाजपा के लिए कोई चुनौती नहीं है।

प्रश्न - प्रियंका वाड्रा को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उनका सक्रिय राजनीति में आना भाजपा के लिए सिरदर्द तो नहीं?

उत्तर : प्रियंका भाजपा के लिए न चुनौती थीं, न हैं और न होंगी। वह पहले अपने परिवार के विषय से निपटे। प्रियंका गांधी हैं या वाड्रा हैं, क्या हैं? उनके पति ने संपत्तियां लूटीं है। हरियाणा से लेकर तमिलनाडु तक जो जमीन इन लोगों ने हड़पे हैं, पहले उसका हिसाब दें।

प्रश्न - राहुल गांधी का चैलेंज है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनसे किसी भी मुद्दे पर 15 मिनट चर्चा नहीं कर सकते?

उत्तर : राहुल गांधी जी को संसद में समय मिला था बातचीत करने के लिए, बोलने के लिए, बहस करने के लिए। निश्चित रूप से कोई समझदार व्यक्ति उनसे पांच मिनट भी बात नहीं कर सकता (हंसते हुए)। वह गंभीर व्यक्ति नहीं हैं, देश जानता है। राहुल अपनी ही पार्टी के किसी नेता से 15 मिनट बात नहीं कर सकते।

प्रश्न - चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका काफी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर अपनी साख बढ़ाने के लिए भाजपा क्या कर रही है?

उत्तर : पिछले 06 महीने में भाजपा ने 54 प्रकार के कार्यक्रम किए हैं। जिसमें सोशल मीडिया से सम्बंधित 08 से 10 कार्यक्रम हुए हैं। सोशल मीडिया की कार्यशाला हमने आयोजित की। जिसमें कार्यकताओं को प्रशिक्षण दिया गया। अब वह अपने काम में पूरी लगन के साथ जुट गए हैं। भाजपा के खिलाफ फैलाई गई भ्रांतियों को खत्म किया जा रहा है और विपक्ष के मंसूबे पर पानी फेरने का काम हो रहा है।

प्रश्न - आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की कितनी रैलियां यूपी में प्रस्तावित हैं?

उत्तर: सामान्यतः प्रत्येक कमिश्नरी पर मोदी जी की एक रैली होगी। लगभग प्रधानमंत्री मोदी की 18 से 20 रैली होगी। अमित शाह की ज्यादा रैली होनी है। कोशिश है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डा. दिनेश शर्मा की प्रत्येक लोकसभा में रैली हो।

प्रश्न - कांग्रेस के घोषणा पत्र और भाजपा के संकल्प पत्र में क्या अंतर हैं?

उत्तर : कांग्रेस का घोषणा पत्र नहीं झूठ पत्र है। अभी तीन राज्यों में कांग्रेस ने कर्जमाफी की बात कही, लेकिन कागजों पर ही काम अटका है। इनकम टैक्स की रेड में इन लोगों के करतूत सामने आ रहे हैं। भाजपा का घोषणा पत्र नहीं संकल्प पत्र है। भाजपा ने जो वादे किए पूरा किये। आगे भी करेंगे।

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