सहारनपुर मंडल की 4 में से 3 सीटों पर त्रिकोणीय और एक पर सीधा मुकाबला होने के आसार

सहारनपुर मंडल की 4 में से 3 सीटों पर त्रिकोणीय और एक पर सीधा मुकाबला होने के आसार


भाजपा पिछली सफलता को दोहराने की कोशिश में और गठबंधन खाता खोलने की फिराक में

सहारनपुर (गौरव सिंघल)। 17वीं लोकसभा के आम चुनावों के पहले चरण के 11 अप्रैल को वेस्ट यूपी के जिन आठ लोकसभा सीटों का मतदान होना है उनमें से सहारनपुर मंडल की चार सीटों पर मतदान से ठीक दो दिन पहले स्थिति बहुत ही रोचक और मुकाबला अत्यंत कड़ा होता दिख रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन सभी आठों सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार सपा-बसपा-लोकदल का गठबंधन बनने के कारण समीकरण बदले हुए हैं और गठबंधन भाजपा को कड़ी टक्कर देता हुआ दिख रहा है। पहले चरण में जिनके भाग्य का फैसला होने वाला है उनमें रालोद सुप्रीमो चौधरी अजीत सिंह मुजफ्फरनगर से, कांग्रेस उम्मीदवार नसीमुद्दीन सिद्दिकी बिजनौर से, सेवानिवृत्त थलसेनाध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री वीके सिंह गाजियाबाद से और मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख एवं केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री डा. सत्यपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा गौतमबुद्धनगर से शामिल हैं।

बागपत और मुजफ्फरनगर पहले चरण की दो ऐसी अकेली सीटें हैं जहां सीधा मुकाबला है। मुजफ्फरनगर सीट पर रालोद सुप्रीमों चौधरी अजीत सिंह को भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान से तगड़ी चुनौती मिल रही है। अजीत सिंह को कांग्रेस-सपा-बसपा तीनों दलों का समर्थन प्राप्त है। यही स्थिति बागपत की भी है। जहां पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के पौत्र जयंत चौधरी सपा-बसपा-कांग्रेस के समर्थन से रालोद उम्मीदवार के रूप में केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इन दोनों सीटों पर यह भी तय हो जाएगा कि जाट भाजपा के साथ है या चौधरी अजीत सिंह खेमें में लौट आए हैं।

सहारनपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद की मुस्लिमों पर पकड़ मजबूत दिखाई दे रही है। जिस कारण गठबंधन के बसपा उम्मीदवार फजलुर्रहमान सहज की स्थिति में नहीं है। भाजपा के राघव लखनपाल शर्मा थोडी आरामदायक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। यदि 11 अप्रैल को मतदाता 2014 की तरह से बूथों पर उमड़ते हैं तो परिणाम भी 2014 जैसा ही हो सकता है और यदि मत प्रतिशत गिरता है तो गठबंधन और कांग्रेस में से कोई भी आगे बढ सकता है। यानि चुनाव नतीजा मतदान के रूझान से तय होगा। कैराना लोकसभा सीट पर सपा उम्मीदवार मौजूदा सांसद तबस्सुम हसन को भाजपा के प्रदीप चौधरी और कांग्रेस के हरेंद्र मलिक से चुनौती मिलती दिख रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद और कांग्रेस नेता इमरान मसूद के हरेंद्र मलिक के समर्थन के कारण मुस्लिम वोटों में विभाजन का नुकसान तबस्सुम हसन को होता दिख रहा है। इसलिए यहां स्थिति भी मतदान वाले दिन ही साफ हो पाएगी। अभी तो तबस्सुम की सीट भी फंसी हुई दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य ने भाजपा के पक्ष में जोरदार चुनाव प्रचार किया। बिजनौर लोकसभा सीट पर भाजपा के मौजूदा सांसद और उम्मीदवार भारतेंद्र सिंह को गठबंधन के बसपा उम्मीदवार मलूम नागर से तगड़ी चुनौती मिलती दिख रही है। मलूक नागर के लिए कांग्रेस उम्मीदवार नसीमुद्दीन सिद्दिकी बड़ा सिरदर्द साबित हो रहे है। सिद्दिकी भारी पड़ते हैं तो कमल खिल सकता है और हलके पड़े तो सीट गठबंधन की झोली में जा सकती है। मतदान से तीन दिन पूर्व तक इस सीट पर पूरा भ्रम बना हुआ है।

Share it
Top