लखनऊ में सपा लगा सकती है वैश्य नेता पर दांव..गठबंधन के लिए राजनाथ सिंह बने चुनौती

लखनऊ में सपा लगा सकती है वैश्य नेता पर दांव..गठबंधन के लिए राजनाथ सिंह बने चुनौती


लखनऊ। लखनऊ लोकसभा सीट पर सपा-बसपा गठबंधन वैश्य नेता पर दांव लगा सकती है। सूत्रों की मानें तो उम्मीदवार को लेकर सपा पार्टी के प्रमुख नेताओं ने उलझी गुत्थी को झुलझा लिया है। सपा बहुत जल्द ही घोषणा कर सकती है।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम के साथ पिछले दिनों लखनऊ लोकसभा प्रत्याशी को लेकर प्रमुख नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में मजबुत प्रत्याशी के चयन को लेकर हर बिन्दु पर विचार हुआ। बैठक में मौजूद नेताओं ने ब्राह्मण, मुस्लिम, वैश्य समाज से प्रत्याशी देने पर अपनी-अपनी बातों को रखा।

सूत्र बता रहे हैं कि सपा के प्रमुख नेताओं ने स्थानीय और बाहरी चेहरे पर भी विचार मंथन किया। इस बिन्दु पर फैसले को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर छोड़ते हुए लखनऊ लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण पर चर्चा की। सपा के प्रमुख नेताओं ने बसपा के महासचिव से भी बातचीत की। मुस्लिम समाज को अपने साथ बांधने के लिए हर सम्भव कोशिश करने की बात कही गयी है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि लखनऊ सीट पर जल्द ही गठबंधन का उम्मीदवार चुनाव मैदान में होगा।

सपा-बसपा गठबंधन के लिए राजनाथ सिंह ही चुनौती

लखनऊ लोकसभा सीट पर 1991 से भाजपा का कब्जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में सपा का प्रत्याशी, भाजपा के प्रत्याशी से 10 गुना कम वोट पाया था और चौथे स्थान पर रहे। इस बार सपा और बसपा के गठबंधन होने पर भी भाजपा को हराने की स्थिति बनती नहीं दिख रही है, इसके लिए गठबंधन के नेताओं का पूरा ध्यान जातीय समीकरण के अनुसार मजबूत प्रत्याशी देने का है। सपा बसपा गठबंधन के नेताओं की मानें तो लखनऊ में लोकसभा चुनाव में गठबंधन के प्रत्याशी की लड़ाई सीधे तौर पर भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह से ही होगी।

वैश्य समाज की है अहम भूमिका

लखनऊ लोकसभा सीट पर कुल 1,949,956 मतदाता हैं। इसमें से महिला मतदाताओं की संख्या 897,693 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,052,171 है। इस लोकसभा सीट पर ब्राह्मण व वैश्य समाज की अहम भूमिका बनती है। इसमें वैश्य समाज की 30 प्रतिशत के लगभग भागीदारी है। वहीं अनूसूचित जाति व जनजाति 10 प्रतिशत व मुस्लिम समाज 21 प्रतिशत की भागीदारी रखता है।

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