रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में हमेशा से महिलाओं का ही रहा है दबदबा

रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में हमेशा से महिलाओं का ही रहा है दबदबा




रायबरेली। रायबरेली लोकसभा सीट पर महिलाओं का ही दबदबा रहा है। अब तक के हुए 16 आम चुनावों और दो उपचुनावों में महिलाएं ही आगे रही हैं। इन चुनावों में 9 बार महिलाओं ने बाजी मारी जबकि महत्वपूर्ण यह है कि उम्मीदवारी के मामले में महिलाओं की संख्या नगण्य ही रही है। एक अपवाद को अगर छोड़ दें तो सभी चुनावों में महिलाओं की जीत पुरुषों के खिलाफ ही हुई है।

राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस सीट से 1971 में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी किस्मत आजमाई। 50.43 प्रतिशत मतों के साथ वह विजयी हुई। इस चुनाव में उनके खिलाफ एक भी महिला प्रत्याशी नहीं थी। 1971 में वह दुबारा विजयी हुईं और उन्हें करीब प्रतिशत मत मिले। आपातकाल के बाद 1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी को हराकर भारतीय लोकदल के राजनारायण जीते। सबसे रोचक चुनाव 1980 का रहा, जब इस महत्वपूर्ण सीट से दो कद्दावर महिला नेत्रियों कांग्रेस से इंदिरा गांधी और बीजेपी की राजमाता विजया राजे सिंधिया के बीच मुकाबला हुआ। चुनाव में इंदिरा गांधी विजयी हुईं। यह पहला ऐसा चुनाव था जब मुकाबला दो महिलाओं के बीच रहा। अन्य चुनावों में महिलाएं ही पुरुषों को हराकर विजयी हुईं हैं।

1989 में फिर एक बार महिलाओं की बारी आई और शीला कौल को विजय मिली। 1991 में दुबारा उन्हें जीत मिली। 1996 और 1998 के बाद 2004 के चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस की परम्परागत सीट को अपनाया। इस सीट से उन्हें भारी मतों से विजय मिली। इस बार सोनिया के विरुद्ध एक मात्र निर्दलीय महिला प्रत्याशी सोना देवी रही। सोनिया को 58.26 प्रतिशत मत के साथ विजय हासिल की। 2006 के उपचुनाव में भी सोनिया के खिलाफ कोई महिला प्रत्याशी नहीं थी और उन्होंने 80.49 मत प्रतिशत के साथ विजय हासिल की।

2014 के आम चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को दोबारा विजय मिली और उन्होंने 63.80 मत प्राप्त किये। इस बार भी उन्होंने पुरुष उम्मीदवार को ही हराया। हालांकि इस बार उनके खिलाफ तृणमूल कांग्रेस से एक महिला उम्मीदवार भी रही। महिलाओं को प्रतिनिधि बनाकर संसद भेजने के मामले में रायबरेली दूसरों से काफी आगे है जिसकी करीब पांच दशक पहले ही शुरुआत हो चुकी थी।


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