दो 'खोपड़ियों' के साथ तमिलनाडु के 111 किसान मोदी के खिलाफ ठोंकेगे ताल

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वाराणसी। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में इस बार लोकसभा चुनाव कई मायनों में काफी दिलचस्प होने जा रहा है। इस संसदीय सीट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दोबारा दावेदारी के बाद भी प्रमुख विपक्षी दल अभी प्रत्याशी ही नहीं तय कर पा रहे हैं। अब तमिलनाडु के 111 किसानों ने यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कर सियासी फिजा गरमा दी है।

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों दो खोपड़ियों और मानव हड्डियों के साथ प्रदर्शन करने वाले तमिलनाडु के किसान प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनावी अखाड़े में चुनावी पैतरा आजमायेंगे। माना जा रहा है कि किसान नेता पी. अय्याकन्नू की अगुवाई में किसान भाषागत दिक्कतों के बाद भी कर्ज माफी को लेकर प्रधानमंत्री को घेरने का कोई अवसर नही चूकेंगे।

समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व राज्यमंत्री मनोज राय धूपचंडी ने कहा कि तमिलनाडु से किसान वाराणसी आकर प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। इससे समझा जा कि उत्तर प्रदेश और पूरे भारत के किसानों में सरकार के प्रति कितना आक्रोश है। वाराणसी के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष और किसान नेता नागेन्द्र सिंह रघुवंशी ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजय रथ को रोकना यहां आसान नही है। प्रधानमंत्री ने वाराणसी में सांसद के रूप में और पूरे देश में प्रधानमंत्री के रूप में जो कार्य किया उसे पूरे देश ने देखा है। आज वाराणसी के साथ पूरा देश प्रधानमंत्री के साथ खड़ा है। रघुवंशी ने कहा कि जमानत जब्त होने के डर से प्रत्याशी यहां चुनाव लड़ने से मना कर रहे हैं।

भाजपा कार्यकर्ता ओमप्रकाश सिंह, श्रवण सिंह, रवि पांडेय, आनन्द सिंह ने कहा कि तमिलनाडु के किसानों को यहां दो हजार वोट भी नहीं मिल पाएंगे। हां इतना जरूर है कि किसान प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़कर चर्चा में रहेंगे। युवा कवि आशु पांडेय ने कहा कि सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए किसानों के साथ देश भर से निर्दलीय भी आ सकते हैं। ऐसे में चुनाव आयोग को देखना चाहिए कि सिर्फ नाम के लिए लोग यहां चुनाव न लड़ पाएं जिनका यहां कोई आधार ही नहीं है।

दरअसल सूखे की मार झेल रहे तमिलनाडु के किसानों ने कर्ज माफी को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर मानव खोपड़ियां लेकर प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि ये खोपड़ियां उन किसानों की हैं जिन्होंने कर्ज के कारण आत्महत्या कर ली थी।


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