लोकसभा चुनाव: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति

लोकसभा चुनाव: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति



लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ने का एलान करने वाली कांग्रेस के एक के बाद एक प्रयोगों से विपक्षी दलों में ही नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं में भी भ्रम की स्थिति बन गयी है।

समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन नहीं होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में लाेकसभा चुनाव 'फ्रंट फुट' पर लड़ने की घोषणा की थी। केन्द्र की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले इस राज्य में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को महासचिव नियुक्त कर मजबूत संदेश दिया था।

प्रियंका ने इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुये कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में जमीनी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अलग-अलग बैठक कर एक नयी ऊर्जा का संचार किया। कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली सूची में अनुभव को तरजीह दी गयी मगर कांग्रेस के एक धड़े में इस सूची ने असंतोष के बीज पनपा दिये।

इस बीच, प्रियंका मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण से मिलने पहुंच गयीं। इस मुलाकात के पीछे संभवत: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दलित मतदाताओं को रिझाना था। रावण से प्रियंका की मुलाकात बसपा प्रमुख मायावती की नाराजगी का सबब बनी जिसके बाद उन्होंने अमेठी और रायबरेली में भी गठबंधन के प्रत्याशी उतारने की मंशा जाहिर की।

अब तक फ्रंट फुट पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही कांग्रेस ने बसपा प्रमुख की नाराजगी को दूर करने के इरादे

रविवार को अमेठी और रायबरेली के बदले सात सीटों को गठबंधन प्रत्याशियों के लिए छोड़ने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उसने जन अधिकार पार्टी के साथ सात और अपना दल (कृष्णा) के साथ दो सीटों का तालमेल किया। आलाकमान के इस फैसले से पार्टी कार्यकर्ताओं में विद्रोह के सुर मुखर हो गये।

प्रियंका के गंगा यात्रा के लिये रविवार देर शाम पार्टी मुख्यालय से निकलते समय अंसतुष्ट कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि सपा-बसपा गठबंधन के लिये सीटें छाेड़ने का कोई औचित्य नहीं है जब श्री राहुल गांधी साफ तौर पर कह चुके थे कि पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

पार्टी के एक नेता ने कहा," गठबंधन के लिये दरियादिली दिखाने की कांग्रेस को फिलहाल जरूरत नहीं थी जब पार्टी खुद के अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही हो। पिछले चुनावों में भी हमने कई सीटों पर उम्मीदवार खड़े नहीं किये थे। इससे तो उन क्षेत्रों पर कांग्रेस विलुप्तता की कगार पर पहुंच जायेगी।" गोंडा से आये कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने कहा, "भाजपा के खिलाफ लडाई में कांग्रेस को अपने दम पर आगे आना होगा। अपना दल (कृष्णा) सरीखी पार्टियों को साथ जोड़ने से कांग्रेस को कुछ हासिल होने वाला नहीं है बल्कि इससे छोटे दलों को ही फायदा पहुंचेगा। जिन संसदीय क्षेत्रों में कांग्रेस अपने उम्मीदवार खड़े नहीं कर रही है, वहां निश्चित रूप से कांग्रेसियों में गहरी निराशा है और जाने अनजाने कांग्रेस खुद को ही खत्म करने में तुली है। "

उधर, बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस की दरियादिली का मखौल उड़ाते हुये उसे सलाह दी कि उनके गठबंधन के लिये सीटे छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है और साथ ही कांग्रेस आलाकमान को भ्रम न फैलाने की चेतावनी भी दे डाली। सपा अध्यक्ष ने कहा, "उत्तर प्रदेश में एसपी, बीएसपी और आरएलडी का गठबंधन भाजपा को हराने में सक्षम है। कांग्रेस पार्टी किसी तरह का कन्फ्यूजन न पैदा करे।" सुश्री मायावती ने इससे पहले कहा, "कांग्रेस यूपी में भी पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह यहाँ की सभी 80 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करके अकेले चुनाव लड़े। हमारा यहाँ बना गठबंधन अकेले बीजेपी को पराजित करने में पूरी तरह से सक्षम है। कांग्रेस जबर्दस्ती यूपी में गठबंधन के लिये सात सीटें छोड़ने की भ्रान्ति न फैलाये।"


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