इलाहाबाद की जनता ने आज तक किसी महिला को नहीं चुना अपना सांसद

इलाहाबाद की जनता ने आज तक किसी महिला को नहीं चुना अपना सांसद


प्रयागराज। लोकसभा चुनाव नजदीक आ चुका है। इलाहाबाद संसदीय सीट के लिए भाजपा एवं महागठबंधन सपा-बसपा और कांग्रेस पार्टी ने इस को पाने के लिए दांव खेलने में लगी हुई है। इलाहाबाद सीट ने देश को दो प्रधानमंत्री दिये हैं लेकिन अब तक इस सीट से कभी कोई महिला सांसद नहीं चुनी गई।

इलाहाबाद जिला जिसका नाम अब प्रयागराज कर दिया गया है, इन दिनों चर्चा में है। कारण है अर्द्धकुंभ, इन दिनों देश ही नहीं विदेशों से भी लोग यहां आए। प्रयागराज तीर्थ स्थली के साथ यहां का ऐतिहासिक महत्व है। इस जिले में दो लोकसभा क्षेत्र हैं-इलाहाबाद और फूलपुर.फूलपुर प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरु का निर्वाचन क्षेत्र रहा है इसलिए उसका अपना महत्व है। इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र भी कई कारणों से चर्चित रहा है। वर्तमान में भाजपा के श्याम चरण गुप्ता सांसद रहे और लगातार स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं से उनका अन्तर विरोध बना रहा। उनका विरोध खुलकर सामने आया और पुत्र मोह के चलते भाजपा से किनारा करते हुए सपा का दामन थाम लिया। अखिलेश और मायावती के गठबंधन में उन्हें टिकट भी मिल गया। सपा यहां से पिछले तीन चुनावों से रेवती रमण सिंह को टिकट देती रही और जीते भी लेकिन 2014 में मोदी के लहर में श्यामा चरण से हार गए। अब कांग्रेस ने पार्टी में नयी जान फूंकने के लिए पूर्वी यूपी का प्रभार प्रियंका गांधी को सौंपा है, ऐसे में यह चुनाव काफी रोचक होने वाला है।

इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, मेजा, करछना, इलाहाबाद दक्षिण, बारा और कोरांव। इनमें से बाड़ा और कोरांव विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। कुल मतदाता लगभग 16,84,489 हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इलाहाबाद जिले के 12 में से नौ सीटों पर कब्जा कर लिया है। इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में आने वाले विधानसभा क्षेत्र में से मेजा सीट से बीजेपी की नीलम कंरवरियां विधायक है। करछना सीट से समाजवादी पार्टी के उज्जवल रमण सिंह विधायक है। इलाहाबाद दक्षिणी सीट से बीजेपी के नंदगोपाल गुप्ता नंदी विधायक है। बारा सीट से बीजेपी के डॉ. अजय कुमार और कोरांव सीट से बीजेपी के राजमणि कोल विधायक हैं। पांच विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा के विधायक हैं जबकि एक पर सपा का विधायक है। इलाहाबाद से लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह और मुरली मनोहर जोशी जैसे राजनीतिक दिग्गज चुनाव जीते हैं। अमिताभ बच्चन भी यहां के सांसद रह चुके हैं। इनके अतिरिक्त जनेश्वर मिश्रा जैसे दिग्गज भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं। इनमें लाल बहादुर शास्त्री और वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

1952 से 2014 तक यहां कई राजनीतिक पार्टियों के नुमाइंदे चुनाव जीतते रहे हैं। इस सीट के पहले सांसद स्वतंत्रता सेनानी श्रीप्रकाश थे और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे।उनके बाद लाल बहादुर शास्त्री 1957 में यहां से सांसद चुने गये। 1973 में भारतीय क्रांति दल के जनेश्वर मिश्रा को जनता ने चुनकर संसद भेजा था। 1984 में अमिताभ बच्चन कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने। 1988 के उपचुनाव में वीपी सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते। 1998 में मुरली मनोहर जोशी जीते। उसके बाद 2004 और 2009 में समाजवादी पार्टी के रेवती रमण सिंह जीते और 2014 में यह सीट पुन: भाजपा के खाते में आ गयी और श्यामा चरण गुप्ता सांसद बने और उन्होंने रेवती रमण सिंह को शिकस्त दी थी। इस सीट से आजादी के बाद से अब तक कोई महिला उम्मीदवार सांसद नहीं बनी। यानी इलाहाबाद की जनता ने आज तक किसी महिला उम्मीदवार को अपना सांसद नहीं चुना है। हालांकि यहां पिछले चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या 749,166 थी। शीर्ष पार्टियों ने भी कभी महिलाओं पर अपना विश्वास नहीं जताया है। इलाहाबाद में साक्षरता दर 2011 की जनगणना के अनुसार इलाहाबाद जिले की आबादी 59,54,390 है। लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर 901 है और साक्षरता दर 72.3 प्रतिशत है।

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