ब्रज की चार सीटों पर फंसा पेंच, असमंजस में भाजपा, पुराने धुरंधरों व दूसरे दलों से आए दिग्गजों की दावेदारी ने भाजपा को मुश्किल में डाला

ब्रज की चार सीटों पर फंसा पेंच, असमंजस में भाजपा, पुराने धुरंधरों व दूसरे दलों से आए दिग्गजों की दावेदारी ने भाजपा को मुश्किल में डाला



आगरा। आगरा और अलीगढ़ मंडल की चार सीटों को लेकर भाजपा में जबरदस्त पेंच फंसा हुआ है। इन सीटों पर भाजपा के पुराने धुरंधर ही नहीं बल्कि दूसरे दलों से आए दिग्गज भी टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैं। भाजपा नेतृत्व पिछले एक हफ्ते से इसी माथापच्ची में उलझा हुआ है कि किसे टिकट दें और किसे नहीं। दावेदार रूठे तो क्या होगा? जातिगत समीकरण क्या बनेंगे? कौन हर हाल में जीत सकता है? फैसला लेने में कहीं चूक हो गई तो कहीं ये सीट न गवां बैठें? कुछ इस तरह के बिंदु शीर्ष नेतृत्व को फैसले में जल्दबाजी करने से रोक रहे हैं। इन चार सीटों पर पेंच इसलिए भी फंसा हुआ है कि इन पर भाजपा के मौजूदा सांसद हैं और दूसरी तरफ नए दावेदार भी मजबूत हैं।

आगरा की बात करें तो यहां से डा. रामशंकर कठेरिया सांसद हैं। इस सीट पर कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल, पूर्व मेयर अंजुला सिंह, पूर्व मंत्री रामबाबू हरित के नाम पिछले दो महीने से उछाले जा रहे हैं। विधायकों और संगठन के लोगों से फीडबैक लेने के बाद पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी यहां तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर क्या फैसला लिया जाए। एक ओर डॉ. कठेरिया की शीर्ष स्तर पर मजबूत पकड़ है तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर संगठन के कुछ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता यहां बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब देखना यह कि भाजपा इस सीट पर क्या फैसला लेती है।

मथुरा सीट को लेकर चर्चाएं हैं कि सिटिंग सांसद हेमा मालिनी मथुरा से ही चुनाव लड़ने का मन बना चुकी हैं। दूसरी तरफ ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा का नाम भी मथुरा सीट के लिए जोरों से चल रहा है। इस स्थिति में भाजपा के अंदरखाने यह चर्चा है कि हेमा मालिनी भले ही मथुरा के लिए अड़ी हैं लेकिन भाजपा उन्हें फतेहपुर सीकरी भी भेज सकती है और श्रीकांत को मथुरा से उतार सकती है। यदि हेमा मालिनी मथुरा से ही चुनाव लड़ीं तो सवाल उठता है कि फतेहपुर सीकरी सीट पर सिटिंग सांसद चौधरी बाबूलाल, पूर्व मंत्री राजा अरिदमन सिंह, वरिष्ठ नेत्री बबिता चौहान और मेयर नवीन जैन में से किसी एक नाम पर भाजपा अपनी मुहर लगा सकती है। इस सीट से राज कुमार चाहर, जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया, मुरारीलाल फतेहपुरिया का भी दावा है।

अलीगढ़ सीट को लेकर भी जबरदस्त पेंच फंसा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अपने रिश्तेदार श्यौराज सिंह को यहां चुनाव लड़ाने के लिए ताकत झोंक रहे हैं, जबकि सिटिंग सांसद सतीश गौतम के अलावा राजेश भारद्वाज, पूर्व मंत्री जयवीर सिंह, पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय भी यहां से ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे में भाजपा नेतृत्व जल्दबाजी न करके संगठन और संघ के कार्यकर्ताओं से सही वस्तुस्थिति पता कर रहा है।

अभी उलझा हुआ है सीमा एवं रामवीर फैक्टर

भाजपा को पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय एवं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय फैक्टर ने भी उलझा दिया है। फतेहपुर सीकरी सीट पर दस दिन पहले तक बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटीं सीमा उपाध्याय को लेकर अब कहा जा रहा है कि वे बीजेपी में शामिल होकर नई पारी शुरू कर सकती हैं। हालांकि पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय एवं पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय द्वारा बार-बार कहा जा रहा है कि वह कहीं नहीं जा रहे, फिर भी चर्चाओं का दौर थम नहीं रहा है। सूत्रों का दावा है कि अगले 24 घंटे में इस तरह की सारी अटकलों और कयासबाजी पर विराम लग जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व ने गेंद पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय एवं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के पाले में ही डाल दी है। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय बसपा के दिग्गज नेता हैं और बिना शर्त के वह भाजपा में किसी सूरत में एंट्री नहीं करेंगे। शर्त क्या होगी, यह बात किसी से छिपी नहीं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी पहली शर्त भाजपा से पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय को टिकट दिए जाने की होगी। ऐसे में भाजपा के सामने मुश्किल होगी कि वह एकदम इस प्रस्ताव पर फैसला कैसे ले।

सूत्रों का कहना है कि इसी कारण मामला अटका हुआ है। भाजपा नेतृत्व पूर्व मंत्री को आश्वास्त नहीं कर पा रहा है और इसलिए पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय भाजपा में शामिल होंगी या नहीं यह चर्चा तभी समाप्त होगी जब भाजपा द्वारा अलीगढ़ और फतेहपुरसीकरी सीट पर प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। उक्त दो सीटों पर जब तक किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं होती है तब तक यही समझा जाए कि वह भाजपा में नहीं आ रहे। आज प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी में दूसरे दलों के कुछ लोग भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। लोगों की नजर टिकी है कि कौन-कौन शामिल हो रहा है। यदि पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय भाजपा में शामिल हुईं और भाजपा ने उन्हें फतेहपुर सीकरी या अलीगढ़ से किसी एक सीट से चुनाव मैदान में उतारा तो इन सीटों के अलावा आसपास के कई लोकसभा सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

पूर्व मंत्री रामवीर पर टकटकी लगाए हैं सपाई और बसपाई

पूर्व मंत्री व बसपा के प्रमुख कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय द्वारा बसपा छोडकर भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं या नहीं, यह बात सपाइयों और बसपाइयों को बेचैन कर रही है। पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय की फतेहपुर सीकरी अथवा अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की जबरदस्त चर्चाओं पर पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। बावजूद इसके सपाई और बसपाई पल-पल की टोह ले रहे हैं कि भाजपा में उन्हें लेकर क्या चर्चाएं हैं। सपा और बसपा के खेमे में आज चर्चाएं थीं कि पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय आज या कल में पूरी स्थिति नए सिरे से स्पष्ट कर सकती हैं। सूत्र बताते हैं कि फतेहपुरसीकरी से कदम खींचने के बाद पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। बसपा में इस पर बात नहीं बनी तो तभी से उनके भाजपा में जाने की चर्चाएं शुरू हुईं थीं। यदि भाजपा ने उन्हें अलीगढ़ या फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाये जाने की सहमति दी तो वह भाजपा में जाने के लिए हां कह देंगे। इन चर्चाओं को लेकर भाजपा और बसपा के नेता काफी सक्रिय दिखाई दिए और एक दूसरे से टोह भी लेते रहे। वहीं भाजपा का एक खेमा भी जो पूर्व मंत्री का विरोध कर रहा है, वह भी पूरी तरह सक्रिय है। स्मरण हो कि पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के अनुज मुकुल उपाध्याय भी हाल ही में बसपा को छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।


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