बस्ती संसदीय सीट पर भाजपा को गठबंधन की ताकत से चुनौती

बस्ती संसदीय सीट पर भाजपा को गठबंधन की ताकत से चुनौती


बस्ती। लोकसभा चुनाव में इस बार उत्तर प्रदेश की बस्ती संसदीय सीट पर दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद है और पिछली बार यहां जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिये इस बार इस सीट पर जीत हासिल करना शायद आसान न रहे।

वैसे तो इस सीट पर सबसे ज्यादा पांच-पांच बार कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार जीतते रहे हैं लेकिन दो बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी को भी यहां के मतदाताओं ने जिताकर लोकसभा भेजा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार ने बहुत कम वोटों से यहां जीत दर्ज की थी। उस वक्त समाजवादी पार्टी (सपा) और बसपा के उम्मीदवारों को मिले कुल वोट 50 फीसदी से ज्यादा थे। ऐसे में अगर इतने ही वोट इस बार भी गठबंधन उम्मीदवार जुटा लेता है तो बस्ती सीट पर भाजपा की जीत की राह खटाई में पड़ सकती है।

बस्ती को अयोध्या का प्रवेश द्वार माना जाता है। गठबंधन के तहत यह सीट बसपा को मिली है और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे राम प्रसाद चौधरी को पार्टी ने इस बार भी यहां से चुनावी मैदान में उतारने का एलान किया है। लोकसभा चुनावों में हार-जीत के आंकड़ों की बात करें तो बस्ती संसदीय सीट पर कांग्रेस ने 1962, 1967, 1971, 1980 और 1984 जीत दर्ज की थी। वहीं, भाजपा ने 1991 में राम मंदिर की लहर से इस सीट को जीतने की जो शुरुआत की वह लगातार 1996 तक जारी रही।

वर्ष 2004 और 2009 में बसपा ने कांग्रेस और भाजपा को पटकनी देते हुये लगातार इस सीट पर कब्जा जमाया लेकिन 2014 में मोदी लहर ने बस्ती संसदीय सीट को भाजपा के खाते में डाल दिया और उसके उम्मीदवार हरीश द्विवेदी सांसद चुने गये।

श्री द्विवेदी ने सपा के उम्मीदवार बृजकिशोर सिंह डिंपल को पिछले लोकसभा चुनाव में 33,562 मतों के अंतर से हराया था जबकि बसपा के वर्तमान उम्मीदवार राम प्रसाद चौधरी 2,83,747 मत हासिल कर तीसरे और कांग्रेस के अंबिका सिंह 27,673 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे थे। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी आनंद राजपाल को 2014 में यहां 8,407 वोट मिले थे।

बस्ती संसदीय सीट पर इस बार 12 मई को छठे चरण में 18,31,666 मतदाता ईवीएम के जरिये अपने पसंदीदा प्रत्याशी को वोट देंगे। इनमें 18,126 मतदाता पहली बार वोट डालेंगे।

अगर पिछले लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा उम्मीदवार ने महज 3.2 फीसदी मतों से जीत दर्ज की थी। 2014 में बस्ती पर हुये मतदान के आंकड़ों पर गौर करें तो सपा और बसपा ने कुल 58 फीसदी वोट हासिल किये थे। इस बार दोनों पार्टियां साथ हैं और ऐसे में भाजपा के लिये बस्ती संसदीय सीट पर जीत हासिल करना लोहे के चने चबाने जैसा हो सकता है।

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