कांग्रेस और भाजपा के लिये नाक का सवाल बनी अमेठी

कांग्रेस और भाजपा के लिये नाक का सवाल बनी अमेठी



अमेठी- कहावत है कि केन्द्र की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से हाेकर जाता है लेकिन लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान होने के साथ ही कांग्रेस के किले के तौर पर विख्यात अमेठी इस बार देश की सबसे पुरानी पार्टी के साथ ही भाजपा के लिये भी नाक का सवाल बन चुकी है।

केंद्र की सत्ता की राह आसान बनाने वाले इस राज्य की अमेठी सीट पर दशकों से कांग्रेस एकछत्र राज करती आयी है। पिछले लोकसभा चुनाव में हालांकि मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने कड़ी टक्कर दी थी। पिछले चुनाव में भाजपा ने छोटे पर्दे पर बहू के किरदार से चर्चित हुयी स्मृति को श्री गांधी के खिलाफ मैदान में उतारा था। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता रहे डॉ. कुमार विश्वास और बसपा से धर्मेंद्र भी मैदान में थे।

कांग्रेस के किले में सेंध लगाने की असफल कोशिश करने वाली भाजपा ने पिछले पांच साल के कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र में अपना दखल बनाये रखा है। केन्द्र के नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल की अहम सदस्य स्मृति ने कांग्रेस अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र का इस दौरान कई बार दौरा किया और जनसभाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश की। उधर केन्द्र सरकार ने भी अमेठी के विकास से संबधित योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई कोताही नहीं बरती।

सुश्री ईरानी जब-जब अमेठी आयीं,उनके निशाने पर राहुल गांधी रहे। श्री गांधी पर क्षेत्र की समस्यायों की अनदेखी का आरोप लगाने के साथ उन्होंने भाजपा सरकार की विकास परियोजनाओं का भी खुलकर जिक्र किया। चुनाव तारीखों की उद्घोषणा से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भी अमेठी का दौरा कर कई परियोजनाओं का जीर्णोद्धार और लोकार्पण किया और कांग्रेस अध्यक्ष पर जमकर प्रहार किये।

उधर, श्री गांधी भी सांसद के फर्ज को निभाते हुये अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच समय निकाल कर अपने संसदीय क्षेत्र में पहुंचकर और चौपाल लगाकर लोगों को अपनेपन का अहसास कराते रहे। यहां दिलचस्प है कि 2014 के चुनाव में कांग्रेस अपने दो किलों अमेठी और रायबरेली को ही बचाने में सफल रही थी।

राज्य में पहली बार मिलकर लोकसभा चुनाव में शिरकत कर रही समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कांग्रेस के साथ हाथ नहीं मिलाया लेकिन उसके लिये अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ दी जिसके चलते इस चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा आमने सामने हैं। कांग्रेस के लिये यह सीट बचाना जहां आसान नहीं होगा वहीं भाजपा इस सीट को जीतकर प्रदेश में कांग्रेस की चूलों को हिलाने के लिये हर पैंतरे का इस्तेमाल करेगी।

वर्ष 2014 के चुनाव में श्री राहुल गांधी ने 4,08,651 वोट हासिल कर जीत हासिल की थी जबकि सुश्री ईरानी को 3,00,748 वोट के साथ दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में हालांकि भाजपा काफी हद तक कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने में सफल रही थी जिसका प्रमाण था कि एकतरफा चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को इस सीट पर 1,07,903 वोटों से ही जीत मिली थी। कुमार विश्वास को सिर्फ 25,000 और बसपा प्रत्याशी को 57,716 वोट हासिल हुये थे।

इससे पहले राहुल गांधी को अमेठी में इतनी जबरदस्त टक्कर कभी नहीं मिली थी। राहुल गांधी ने 2009 के आम चुनाव में अमेठी सीट को 3,70,198 मतों के अंतर से जीता था । उनके प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी आशीष शुक्ला को 93,997 मत ही हासिल हुए थे। जबकि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप सिंह को 37,570 वोट मिले थे।

वर्ष 2004 के चुनावों में राहुल ने बीएसपी के चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी को 2,90,853 वोटों से शिकस्त दी थी। इससे पहले 1999 में सोनिया गांधी ने अमेठी सीट पर कुल पड़े 6,38,180 में से 4,28,346 वोट हासिल कर 3,06,909 वोटों से जीत दर्ज की थी। बात करें 1984 में हुए आम चुनाव की तो उस वक्त राजीव गांधी ने 3,22,087 वोटों से अमेठी का किला जीता था।

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