रायबरेली: सोनिया को घेरने के लिए स्थानीय नेता पर दांव लगा सकती है भाजपा

रायबरेली: सोनिया को घेरने के लिए स्थानीय नेता पर दांव लगा सकती है भाजपा




रायबरेली। भाजपा लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी को उनके ही गढ़ में घेरने की कवायद में है। माना जा रहा है इसके लिए पार्टी किसी स्थानीय नेता को उम्मीदवार बना सकती है। इसके लिए पार्टी ने कांग्रेस को उसके ही तरकश के तीर से परास्त करने की तैयारी कर ली है।

करीब एक वर्ष पूर्व ही भाजपा ने इस रणनीति पर काम करना भी शुरू कर दिया था। इसकी शुरुआत पार्टी ने कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह, हरचंदपुर से विधायक राकेश प्रताप सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह को अपने पाले में करके की। धीरे-धीरे और कई दूसरे दलों के नेताओं को अपने पाले में करके भाजपा ने अपने को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की है, जिससे सोनिया गांधी को उनके ही गढ़ में घेरा जा सके।

वैसे देखा जाए तो रायबरेली में कांग्रेस केवल तीन बार ही पराजित हुई है। इसमें 1977 के अलावा स्थानीय प्रत्याशी ने ही उसको मात दी है। 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के अशोक सिंह ने कांग्रेस को पराजित किया था। वह रायबरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ साथ एक कद्दावर नेता माने जाते थे और कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता थे।

बाद में भाजपा ने इनको प्रत्याशी बनाकर दो बार चुनाव जीत लिए। शायद इसी लिहाज से इस बार भाजपा को स्थानीय उम्मीदवार ज्यादा मुफीद लग रहा है। इसकी आहट भाजपा के बड़े नेताओं द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले बाहरी बनाम स्थानीय और चारागाह जैसे शब्दों से मिलती है। सियासी फिजाओं में दिनेश प्रताप सिंह टिकट के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। वह रायबरेली की सियासत में एक बड़ा चेहरा हैं। इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहित स्मृति ईरानी, सुनील बंसल, केशव मौर्य जैसे बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में वह बेहद सक्रिय रहे हैं और इन्हें सफल बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है। स्थानीय नेता होने के कारण इस सीट पर उनका दावा मजबूत माना जा रहा है।

वर्ष 2014 में सोनिया गांधी को 5 लाख 26 हजार 434 वोट मिले थे। वहीं भाजपा उम्मीदवार अजय अग्रवाल 1 लाख 73 हजार 721 वोट पाकर दूसरे पायदान पर रहे थे। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को 63 हजार 633 वोट और आम आदमी पार्टी को 10 हजार 383 वोट ही मिल सके। मतदान प्रतिशत की बात करें तो कांग्रेस के खाते में सर्वाधिक 63.80 प्रतिशत वोट पड़े थे। भाजपा को 21.05 फीसदी वोट प्राप्त हुए। इसके अलावा बसपा को 7.71 प्रतिशत और आम आदमी पार्टी को 1.26 फीसदी वोट मिले। भाजपा इस बार स्थनीय उम्मीदवार उतारकर सियासी समीकरण अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है।

वहीं अगर पिछले एक वर्ष की रायबरेली की राजनीति पर गौर किया जाए तो लगातर भाजपा ने विकास के साथ-साथ गांव और पंचायतों के नेताओं और प्रमुखों में अपनी पैठ बनाने के प्रयास किये हैं और पार्टी की कोशिश रही है कि जनाधार वाले नेताओं को अपने से जोड़ा जा सके।

इसके लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल और कई बड़े नेताओं की सक्रियता काफी काम आयी है। हालंकि यह कितना कारगर होगा यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा लेकिन अगर इसी रणनीति से भाजपा आगे बढ़ती रही तो सोनिया गांधी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है।


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