मुलायम का 'धड़कन' से नाता टूटने के बाद बदले आजमगढ़ के समीकरण

मुलायम का धड़कन से नाता टूटने के बाद बदले आजमगढ़ के समीकरण



आजमगढ़। कभी इटावा को 'दिल' और आजमगढ़ को 'धड़कन' कहने वाले समाजवादी पार्टी के संरक्षक व सांसद मुलायम सिंह यादव ने अपनी धड़कन (आजमगढ़) से नाता तोड़ लिया। शुक्रवार को समाजवादी पार्टी ने 06 लोकसभा उम्मादवारों की सूची जारी की, जिसमें मुलायम सिंह यादव अब आजमगढ़ के बजाय मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे। मुलायम सिंह के आजमगढ़ छोड़ने के बाद समाजवादी पार्टी ने इसे नेताजी की राय और शीर्ष नेतृत्व का फैसला करार दिया, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने मोदी और योगी के विकास की जीत बताकर समाजवादी पार्टी पर हमलावर है।

मुलायम सिंह के यहां चुनाव मैदान से हटने के बाद समीकरण भी बदलने लगे हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में मात खाने वाली समाजवादी पार्टी ने मुलायम सिंह यादव की वजह से आजमगढ़ सीट पर किसी तरह इज्जत बचाई थी। जैसे-तैसे अपनी सीट बचाने के बाद मुलायम सिंह यादव इतना नाराज हुए कि उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कई बार इसका इजहार भी किया। मुलायम की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर वर्ष 2016 के सठियांव चीनी मिल के उद्घाटन को छोड़ दिया जाय तो वे सांसद के रूप में कभी आजमगढ़ नहीं आये। वर्ष 2018 में ही मुलायम सिंह आजमगढ़ से चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा भी जता चुके थे। अब पार्टी ने सूची जारी कर यह साफ कर दिया कि मुलायम सिंह आजमगढ़ नहीं बल्कि मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे।

मुलायम के यहां से चुनाव न लड़ने की घोषणा के बाद अब राजनैतिक समीकरण भी बदलने लगे हैं। माना जा रहा है कि अगर यहां से मुलायम परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में नहीं उतरता है तो चुनाव काफी दिलचस्प होने की उम्मीद है। मुलायम के आजमगढ़ छोड़ने के सवाल पर कल्पू यादव, महेन्द्र विश्वकर्मा, नीतिन श्रीवास्तव का कहना है कि आजमगढ़ में अब तक जो भी विकास कार्य हुए हैं, वह मुलायम सिंह की ही देन हैं। यह अलग बात है कि वह अब यहां से चुनाव नहीं लड़ना चाहते।

समाजसेवी रणविजय सिंह कहते हैं कि जिले में अगर किसी ने विकास कार्य किया तो वह मुलायम सिंह ही हैं। पूरब से लेकर पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक मुलायम के ही काम नजर आयेंगे जिसे कोई नकार नहीं सकता। समाजवादी पार्टी के मीडिया प्रभारी एसके सत्येन कहते हैं कि मुलायम सिंह ने आजमगढ़ को नहीं छोड़ा है, न ही आजमगढ़ की जनता ने उनको छोड़ा है और न ही छोड़ेंगे। आजमगढ़ के विकास की हर ईंट पर मुलायम सिंह यादव का नाम है। उनकी इच्छा मैनपुरी से चुनाव लड़ने की थी, वे मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे।

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला महामंत्री और डीसीएफ के डायरेक्टर बृजेश यादव कहते हैं कि मुलायम सिंह जब से चुनाव जीतकर गये, कभी आजमगढ़ की जनता का दुःख -दर्द तक पता करने नहीं आये। लोग पांच सालों तक अपने सांसद को ही खोजते रह गये। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार विकास कार्य कर रहे हैं। यहां विकास कार्यों को देखकर मुलायम सिंह भी घबरा गये हैं, यहां की जनता ने उन्हें नकार दिया है। इसलिए वे आजमगढ़ से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।


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