राम मंदिर मामले में केंद्र की पहल से संतों में खुशी की लहर

राम मंदिर मामले में केंद्र की पहल से संतों में खुशी की लहर


रायबरेली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार से मिली एक 'उम्मीद' से साधु संतों सहित हिन्दू संगठनों में खुशी का माहौल है। ज्यादातर संत सरकार की इस पहल को मंदिर निर्माण के लिए सकारात्मक पहल बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे चुनावी स्टंट करार दे रहे हैं।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी देकर अयोध्या में अविवादित जमीन को रामजन्मभूमि न्यास को देने की मांग की है। रायबरेली के प्रसिद्ध डलमऊ मठ के महंत स्वामी देवेंद्रगिरी ने बुधवार को बताया कि आजादी के बाद पहली बार सरकार की ओर से मजबूत पहल हुई और यह स्वागत योग्य है। अब संभव है कि जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर की शुरुआत हो सके।

महर्षि गोकर्ण धाम के प्रमुख स्वामी हरिहर देव आश्रम के अनुसार सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण है और इसे एक सकारात्मक नजरिये से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायालयी प्रक्रिया में लगातार व्यवधान आ रहा है। इससे लोगों का धैर्य समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह पहल करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं के अनुरूप है। श्री रामजानकी आश्रम के पीठाधीश्वर मौनी स्वामी ने कहा कि अब राम मंदिर के निर्माण को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को इसका समर्थन करते हुए अंतिम निष्कर्ष निकालना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार की इस अर्जी का समर्थन किया और उम्मीद जताई कि जल्दी ही यह कार्यरूप में यह परिणित होगा। कुछ संतों ने इस अर्जी को सरकार की इस अर्जी को चुनावी स्टंट बताते हुए आलोचना की है। सरकार की इस पहल का संत समाज के अलावा हिन्दू संगठनों ने भी स्वागत किया है।

विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत मंत्री राम गोपाल ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए राम मंदिर निर्माण की दिशा में दूरगामी पहल बताया है। सरकार से मांग की है कि इस दिशा में आ रही बाधाओं को जल्दी दूर करें।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रान्त संपर्क प्रमुख रामचंद्र ने भी सरकार द्वारा दी गई अर्जी को एक अच्छी शुरुआत बताया और विश्वास जताया कि केंद्र सरकार मंदिर निर्माण के लिए गंभीरता से पहल कर रही है।

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