दिवंगत कारसेवक वासुदेव के बच्चे भी चाहते हैं कि बंद हो मंदिर पर राजनीति, जल्द हो निर्माण

दिवंगत कारसेवक वासुदेव के बच्चे भी चाहते हैं कि बंद हो मंदिर पर राजनीति, जल्द हो निर्माण


लखनऊ। 'सन 90 में मंदिर निर्माण के लिये आन्दोलन के दौरान मेरे पिता ने अपनी जान दे दी थी। उनकी मौत के बाद मेरी बदतर जिन्दगी को मां ने किसी तरह संभाला। पिता को खोने के बाद जिन्दगी का दर्द क्या होता है, यह हमसे अच्छी तरह कोई नहीं जान सकता। इसलिए हम चाहते हैं कि राजनीति बन्द करके राम मंदिर का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाये।'

यह कहना है अयोध्या में तुलसी उद्यान के पास नये घाट पर छोटी सी कपड़े की दुकान चलाने वाले भाई-बहन सरोज व संदीप का। यह दोनों राम मंदिर आन्दोलन के दौरान दो नवम्बर 1990 को पुलिस गोलीकांड में मारे गये कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बच्चे हैं। पिता की मत्यु के समय मात्र चार साल की रही सरोज कहती है कि पिता की मृत्यु के समय वह अबोध थी। उसकी मां ने आर्थिक अभाव के बावजूद उसे और उसके भाई को किसी तरह पालने की ठानी। मात्र छोटी सी दुकान के जरिये किसी तरह पाल पोसकर बड़ा किया लेकिन आर्थिक तंगी ने परिवार का पीछा नहीं छोड़ा। अब वह अपने छोटे भाई के साथ मिलकर दुकान चलाकर किसी तरह जीविका चला रही है।

उसका भाई संदीप कहता है कि वह भी चाहता है कि मंदिर निर्माण जल्द हो ताकि उसके पिता की अन्तिम इच्छा जल्द पूरी हो सके। उसने बताया कि पिताजी की इच्छा को देखते हुये ही उसने अपनी बहन के साथ गत छह नवम्बर को दीपोत्सव के मौके पर निकली झांकियों का स्वागत करके झांकियों पर फूलों की वर्षा की थी। संदीप को अभी भी इस बात का मलाल है कि उसके परिवार का हाल-चाल पूछने अब कोई नहीं आता। अशोक सिंहल जब तक जिन्दा थे तब तक यदा-कदा कोई आ भी जाता था लेकिन अब तो वह भी बन्द हो गया।

संदीप ने बताया कि बहन की शादी नहीं हो पाने के कई कारणों में से एक आर्थिक तंगी भी है लेकिन किससे कहें और क्या कहें। तमाम क​ठिनाइयों में गुजर-बसर कर रहे स्वर्गीय वासुदेव गुप्ता का परिवार चाहता है कि राम मंदिर पर अब राजनीति बन्द होनी चाहिये। अब इसका निर्माण जल्द होना चाहिये।रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें


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