महोबा में काम के बदले अनाज योजना घोटाले की सीबीआई जांच शुरु

महोबा में काम के बदले अनाज योजना घोटाले की सीबीआई जांच शुरु


महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में डेढ़ दशक पूर्व काम के बदले अनाज योजना में हुए बहुचर्चित घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच शुरू की है। राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम से जुड़े इस मामले में ब्यूरो के विशेष जांच दल ने शुक्रवार को यहां डेरा डाला और विभागीय पत्रावलियों का निरीक्षण एवं पड़ताल की। इस सिलसिले में लोगों के बयान दर्ज किए गये हैं।

सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी डी0पी0 सिंह ने शनिवार को बताया कि वर्ष 2004 में सूखे की चपेट में आये अति पिछड़े बुंदेलखंड में राहत कार्यो के अंतर्गत सरकार ने पंचायतों के माध्यम से निर्बल वर्ग के लोगो के लिए काम के बदले अनाज योजना चलाई थी जिसमे गरीब, मजदूरों को उनके कार्य का पारिश्रमिक के साथ आधी कीमत पर खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया जाना था।

उन्होने बताया कि आरोप है कि इसके क्रियान्वयन में महोबा जिले में अधिकारियों ने व्यापक पैमाने पर धांधली की। वे मजदूरों के हक को हड़प कर समूचा खाद्यान्न डकार गए। राशन को गोदाम से वितरण केंद्र तक पहुंचाने के नाम पर घोटाले का यह खेल प्रमुख रूप से खेला गया। इस कार्य में जिन भार वाहनों के नम्बर दर्शाए गए थे वह बाइकों और स्कूटरों के रजिस्ट्रेशन पाए गए।

सीबीआई अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2004-05 के बीच एक वर्ष तक चली काम के बदले अनाज योजना में हुई इस धांधली का खुलासा होने पर मामला जांच के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को सौंपा गया था जिसकी लम्बे समय तक चली विस्तृत पड़ताल में छह लाख 55 हजार 871 रुपये का घोटाला होने की बात सामने आई थी।

इसके बाद जांच अधिकारी रामवीर सिंह ने 21 अगस्त 2010 को महोबा कोतवाली में यहां उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम के तत्कालीन जिला प्रभारी मुकेश कुमार, प्रबंधक मोहन ब्यास गौतम, प्रेषण प्रभारी एम0पी0 अग्निहोत्री, गोदाम प्रभारी भारत भूषण सिंह, राजेश कुमार, बहादुर सिंह, रामबली सिंह व परिवहन ठेकेदार शिवबरन सिंह समेत आठ लोगों के विरुद्ध विभिन्न गम्भीर धाराओं में नामजद मुकदमा पंजीकृत कराया था। लेकिन बाद में प्रकरण की जांच सीबीआई को सौप दी गई।


Share it
Top