मुलायम विरोध ने दर्शन सिंह को कभी भी नहीं करने दिया 'जनमत' हासिल

मुलायम विरोध ने दर्शन सिंह को कभी भी नहीं करने दिया जनमत हासिल


इटावा। समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव और दिवंगत दर्शन सिंह यादव एक वक्त गहरे दोस्त हुआ करते थे लेकिन एक वजह से यह दोस्ती दुश्मनी में तब्दील हो गई।

दरअसल, एक जमाने में इटावा में मुलायम सिंह यादव और दर्शन सिंह यादव की मित्रता के कसीदे पढ़े जाते थे क्योंकि दर्शन सिंह यादव कारोबारी लिहाज से मुलायम सिंह के लिये आर्थिक तौर पर मददगार साबित रहे है । बाद में दर्शन की महत्वाकांक्षा ने जोर पकड़ा और वह खुद को मुलायम के समकक्ष मनाने लगे।

दोनों के बीच अनबन की शुरूआत 1988 में इटावा जिला पंचायत के अध्यक्ष को लेकर शुरू हुई। सपा संस्थापक के मित्र होने के नाते दर्शन हक जताते हुए जिला परिषद के अध्यक्ष की मांग कर बैठे जबकि मुलायम ने भाई रामगोपाल को दर्शन के मुकाबले काबिज कराना मुनासिब समझा।

मुलायम के इसी कदम के बाद दोनों के बीच दूरियां बन गयी। इस बीच 1989 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जसवंतनगर सीट पर मुलायम समाजवादी जनता पार्टी से मैदान में उतरे तो वही दर्शन कांग्रेस के टिकट पर मुलायम सिंह यादव के मुकाबले उतरे लेकिन नतीजा मुलायम सिंह यादव के पक्ष में आ गया। नतीजे के बाद मुलायम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में अजीत सिंह को पछाड कर गद्दी पर काबिज हो गए। इसके बाद दोनों के बीच तकरार ओर बढ़ चली।

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