ओने-पौने दामों में किसानों का गन्ना खरीद रही चीनी मिलें

ओने-पौने दामों में किसानों का गन्ना खरीद रही चीनी मिलें

मेरठ। चीनी मिलों के नहीं चलने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर तो वह अपने खेतों को खाली नहीं कर पा रहे। मजबूरी में जब वह अपना गन्ना लेकर कोल्हू-क्रैशरों पर जा रहे हैं तो वहां पर ओने-पौने दामों में गन्ना खरीदा जा रहा है। जबकि शासन ने जल्दी ही चीनी मिलों को चलाने का दावा किया था।
चीनी मिलों के शुरू न होने से कोल्हू-क्रैशर संचालकों की चांदी कट रही है। मेरठ परिक्षेत्र की चीनी मिलों ने 23 अक्टूबर से 29 नवंबर तक नया पेराई सत्र शुरू करने का ऐलान किया हुआ है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मेरठ परिक्षेत्र में केवल मोदीनगर चीनी मिल ने पेराई शुरू की है।
शासन की मंशा को चीनी मिलों का पलीता
शासन ने किसानों के फायदे के लिए अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही चीनी मिलों को चलाने की बात कही थी। मेरठ परिक्षेत्र में अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई ज्यादा होने के कारण दस अक्टूबर तक पेराई शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक मोदीनगर चीनी मिल को छोड़कर किसी भी मिल ने पेराई सत्र की शुरूआत नहीं की है। इस कारण किसानों को गेहूं की बुआई के लिए अपने खेत खाली करने के लिए गन्ना कोल्हू पर डालना पड़ रहा है। जहां पर 230 से 250 रुपए कुंतल का ही भाव मिल रहा है।
गन्ने की लेट बुआई भी मुसीबत
चीनी मिलों के लेट चलने के पीछे वेस्ट यूपी में गन्ने की बुआई का संतुलन बिगड़ना भी एक बड़ी वजह है। बिगड़े गन्ना बुआई समीकरणों के कारण ही चीनी मिल लेट चलती है। चीनी मिलों का तर्क है कि गन्ने में परता कम आने से कम चीनी बन पाती है। इसलिए पेराई सत्र लेट होने से गन्ने में परता ठीक आता है। हालांकि गन्ना विभाग ने किसानों के साथ सख्ती करके अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई ज्यादा कराई है। इसके बाद भी चीनी मिल लेट चल रही है। अभी तक गन्ना सुरक्षण आदेश जारी नहीं हो पाया है।
रालोद करेगा आंदोलन
राष्ट्रीय लोकदल के मंडल अध्यक्ष गजेंद्र सिंह धामा का कहना है कि चीनी मिलों के समय पर नहीं चलने के कारण किसानों का शोषण हो रहा है। किसान अपना गन्ना ओने-पौने दामों में कोल्हू पर लुटा रहे हैं। इसके खिलाफ रालोद जल्दी ही बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। किसानों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा।

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