50 मिनट में तय होगा मेरठ से दिल्ली तक का सफर : कमिश्नर

50 मिनट में तय होगा मेरठ से दिल्ली तक का सफर : कमिश्नर


मेरठ। प्रदेश व केन्द्र सरकार के प्रयासों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विकास के नए पंख लग जाएंगे। ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे के बाद अब मेरठ से दिल्ली के सराय काले खां तक का सफर केवल 50 मिनट में तय होगा। दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक हाई स्पीड ट्रेन तथा मेरठ शहर मे दो काॅरीडोर पर मेट्रो चलेगी। आरआरटीएस की कुल लम्बाई 90 किमी होगी जिसमें 22 स्टेशन होंगे तथा यह दूरी 62 मिनट में तय होगी। आरआरटीएस पर कार्य डीपीआर के कैबिनेट से स्वीकृति के 45 दिन के अन्दर शुरू होगा। यह काम जून जून 2024 तक पूरा हो जाएगा। इसकी कुल लागत 31632 करोड़ रूपये आयेगी। परतापुर से मोदीपुरम तक मेट्रो व हाई स्पीड ट्रेनएक ही एलाइमेंट में होगी।
शनिवार को आयुक्त सभागार में आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) के कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने बताया कि आरआरटीएस भारत में अपनी तरह की पहली क्षेत्रीय रेल सेवा लेकर आ रहा है, जो दिल्ली से मेरठ तक होगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2018-19 में 250 करोड़ रूपये व केन्द्र सरकार ने 659 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।
आयुक्त ने बताया कि आरआरटीएस की डीपीआर डीएमआरसी द्वारा बनायी गयी, जिसको मई 2017 में प्रदेश सरकार ने स्वीकृत किया व वर्तमान में यह केन्द्र सरकार में जमा की जा चुकी है तथा पीआईबी स्टेज में है, जिसकी बैठक अगस्त के प्रथम सप्ताह में अपेक्षित है। पीआईबी के बाद यह कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। कैबिनेट की स्वीकृति के 45 दिन के अन्दर कार्य प्रारम्भ करने का आश्वासन एनसीआरटीसी द्वारा दिया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकारी आपस में समन्वय बनाकर इस प्रोजेक्टर पर कार्य करें।

एनसीआरटीसी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम) के ग्रुप महाप्रबंधक प्लानिंग सुधीर शर्मा ने बताया कि मेट्रो के दो काॅरीडोर होंगे परतापुर से मोदीपुरम तक प्रथम काॅरीडोर तथा श्रद्धापुरी से बेगमपुल होते हुए जागृति विहार एक्सटेशन तक द्वितीय काॅरीडोर होगा। आरआरटीएस की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा होगी तथा वह 160 किमी प्रति घंटा तक चलेगी तथा औसत गति 100 किमी प्रति घंटा होगी। इसकी गति मेट्रो की गति से तीन गुनी होगी। आरआरटीएस 80 प्रतिशत ऐलीवेटिड व 20 प्रतिशत अंडरग्राउंड होगी। आरआरटीएस पर साहिबाबाद से दुहाई तक कुल 16.5 किमी पर दो पैकेजस में कार्य किया जाएगा, जिस पर टेंडर आमंत्रित किये जा चुके हैं। बेगमपुल पर इंटरचेज होगा तथा परतापुर व मोदीपुरम के बीच मेट्रो यात्रियों को दिल्ली जाने के लिए आरआरटीएस उपलब्ध होगी। परतापुर से मोदीपुरम के बीच 18 किलोमीटर लंबी दूरी 15 मिनट में तय होगी। परतापुर से मोदीपुरम तक मेट्रों व आरआरटीएस एक ही एलाइमेंट में होने से इसकी लागत में 6500 करोड़ रुपये की कमी आयेगी। इसकी कुल दूरी 90 किलोमीटर होगी, जोकि 62 मिनट का सफर होगा तथा दिल्ली के सराय काले खां से परतापुर मेरठ तक का सफर 50 मिनट में तय होगा।
रैपिड रेल में लगेंगे छह कोच
आरआरटीएस के प्रथम फेस में छह कोच लगाये जाएंगे। बाद में इसकी संख्या 12 कर दी जाएगी। दो हजार से ज्यादा लोग एक साथ सफर कर सकेंगे। आरआरटीएस के लिए एशियन डवलपमेंट बैंक (एडीबी) से 60 प्रतिशत ऋण, 20 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा व शेष 20 प्रतिशत उत्तर प्रदेश व दिल्ली सरकार द्वारा दिया जाएगा। एनसीआरटीसी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम) चार राज्यों, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान में कार्य कर रहा है तथा इन चारों प्रदेशों की प्रत्येक की इसमें इक्युटी 12.5 प्रतिशत है। 50 प्रतिशत केन्द्र सरकार का है। उन्होंने बताया कि एनसीआरटीसी के आठ काॅरीडोर है जिसमें प्रथम चरण में तीन काॅरीडोर जिसमें दिल्ली से मेरठ 90 किमी प्रथम काॅरीडोर, दिल्ली से गुड़गांव होते हुए अलवर राजस्थान तक 180 किमी का द्वितीय काॅरीडोर तथा दिल्ली से सोनीपत होते हुए पानीपत तक 111 किमी का तृतीय काॅरीडोर होगा। यह कार्य सन 2032 में ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार को 5828 करोड़ रुपये, दिल्ली सरकार को 1138 करोड़ रुपये व केन्द्र सरकार को 5686 करोड़ रूपये खर्च करने होंगे।
अगले 50 साल का ट्रैफिक ध्यान रखा गया
एनसीआरटीसी के ग्रुप महाप्रबंधक प्लानिंग सुधीर शर्मा ने बताया कि अगले 50 वर्ष के ट्रैफिक को ध्यान में रखकर आरआरटीएस पर कार्य चल रहा है। इसके लिए परतापुर से मोदीपुरम तक अब छह के स्थान पर 12 स्टेशन होंगे। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए भूमि या जो लीज पर ली जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए वन, सिंचाई, बिजली, जीडीए, एमडीए, स्पोट्र्स अथोरिटी, लोनिवि विभागों से एनओसी प्राप्त किये गये है तथा प्रोजेक्ट की जियो टेक्निकल इन्वेस्टीगेशन आधार पूर्ण किया जा चुका है।
मेरठ के जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए 40 किमीटर सड़क का चैड़ीकरण किया जाना है, जिसमें गाजियाबाद से दुहाई तक 14 किमी है तथा 135 हैक्टेयर भूमि अधीग्रहण किया जाना है जिसमें से 100.2 हैक्टेयर गाजियाबाद में व 35 हैक्टेयर मेरठ में किया जाना है।

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