मेरठ: स्वाइन फ्लू के मिले 31 नये मरीज

मेरठ: स्वाइन फ्लू के मिले 31 नये मरीज

मेरठ। मेरठ में स्वाइन फ्लू से स्वास्थ्य विभाग मे हड़कंप मचा हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। स्वाइन फ्लू के इस प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में भी हाई अलर्ट कर दिया है, स्वास्थ्य विभाग के पर्याप्त दवाई होने तथा स्वाइन फ्लू पर नियंत्रण के लिए किये जा रहे दावों की कलई खुल रही है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों के परिवारों के सदस्यों को टेमी फ्लू दे रहे है। साथ ही आस-पास के इलाकों में लोगों की जांच कराई जा रही है। सीएमओ ने स्वाइन फ्लू वार्ड में रोगी के उपचार के पुख्ता प्रबंध करने के निर्देश जारी किये हुए है, साथ ही कहा की बुखार के रोगियों को गंभीरता से लें और जांच कराते हुए उपचार कराएं। सीएमओ मेरठ डा. राजकुमार का कहना है कि उनके पास प्रयाप्त डोज़ है, लेकिन काफी संख्या में मरीज पीडि़त है और लगातार मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, ऐसे में इतनी डोज़ कहा से आएगी। 31 नए मरीजों के मिलने पर स्वास्थ्य विभाग हड़कंप मच गया है। मेडिकल की माइक्रोबायोलोजी लैब में आसपास के सभी सैंपलों को मिलाकर मरीजों की संख्या 232 तक पहुंच गई है। आधा दर्जन लोग शहर के विभिन्न अस्पतालों में वेंटीलेटर पर हैं। सप्ताहभर में 11 मरीजों के साथ सबसे कम आंकड़ा दर्ज हुआ था। लैब में 87 सैंपलों की जांच में 31 में एच1एन1 वायरस की पुष्टि हो गई। इसमें बच्चों से लेकर बुर्जुगों समेत सभी उम्र वर्ग के मरीज हैं। सीएमओ डा. राजकुमार ने कहा कि 26 मरीज मेरठ के, जबकि पांच अन्य जिलों के हैं। मौसम में बदलाव जैसे बारिश होने काफी तेजी से बढ़ेगा वायरस जिससे सप्ताहभर तक संक्रमण तेज रहेगा। गर्म एवं आद्र्र मौसम में भी फ्लू का वायरस एलर्जी के साथ तेजी से फैलता है। बुजुर्ग एवं शुगर के मरीजों पर स्वाइन फ्लू का घातक असर देखा जा रहा है। मेरठ के कई मरीज विभिन्न अस्पतालों में इलाज ले रहे हैं। इनमें से कई मरीजों की स्थिति नाजुक बताई गई है। डॉक्टरर्स का कहना है कि ये वायरस 5 साल से कम उम्र के बच्चों तथा कमजोर इम्यून सिस्टम वालों में सबसे ज्यादा तेजी से फैलता है।
बचाव ही है इस बीमारी का इलाज-
सुबह से शाम तक कम से कम 4 से 5 बार तथा कुछ भी खाने से पहले हाथ को गर्मपानी और साबुन से जरूर धोना चाहिए। हाथों को नाक के आसपास न ले जाएं।
स्वाइन फ्लू का वायरस गला पकड़ता है, ऐसे में गर्म तरल जैसे गर्म दूध, पानी व चाय पीते रहें। छींकने या खांसने पर रूमाल का प्रयोग करें। हो सके तो घर के बाहर सार्वजनिक स्थान पर जाते समय मास्क लगाकर रखें।
स्वाइन फ्लू के लक्षण-
छींक आना और लगातार नाक का बहना, तेज बुखार आना, मांसपेशियों में दर्द या अकडऩ होना, नींद न आना ज्यादा थकान होना, सिर में भयानक दर्द, दवा खाने के बाद भी लगातार बुखार का बना रहना, गले का खराश, कफ, कोल्ड और लगातार खांसी का आना आदि स्वाईन फ्लू के लक्षण है।
क्या है स्वाइन फ्लू-
स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इंफ्लुएंजा वायरस से होने वाला इन्फेक्शन है। इस वायरस को ही एच1एन1 कहा जाता है। इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा जाता है क्योंकि सूअर में फ्लू फैलाने वाले इन्फ्लुएंजा वायरस से यह मिलता जुलता है। अप्रैल 2009 में इस बीमारी (वायरस) को सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया। खांसी या छींक, त्वचा से त्वचा संपर्क (हाथ मिलाना या गले मिलना), लार (चुंबन या एक ही पेय साझा करना), किसी दूषित सतह (कंबल या दरवाजे की कुण्डी) के छूने से ये बीमारी फैलती है। इससे बचने के लिए पूजा में प्रयोग होने वाले कपूर, तुलसी, इलायची को एक में मिलाकर पीस लें। इसे अपने पास रखें और थोड़ी-थोड़ी देर पर डिब्बी खोलकर इसकी सुगंध लेते रहें। तुलसी की 5 पत्तियां रोज सुबह खाली पेट खाएं। कपूर की एक गोली एक माह में एक बार गुनगुने पाने से निगल लें। बच्चों को इसे आलू और केले में मिलाकर एक माह में एक बार खिलाना चाहिए। 2 जवा लहसुन गुनगुने पाने से निगल लें, दूध में हल्दी पॉउडर डालकर उबाल लें फिर उसे गुनगुना कर पी लें। नीम की 5 पत्तियां सुबह चबाकर खा लें। साथ में 2 चम्मच आंवला का जूस भी फायदेमंद होता है। डा. अमिताभ गौतम ने बताया कि बुखार के साथ खांसी व सांस फूलने पर तत्काल टेमीफ्लू शुरू करना चाहिए। कई बार जांच होकर रिजल्ट आने तक मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है, जहां टेमीफ्लू नाकाम हो सकती है। डाक्टर नारायण ने बताया कि हल्दी, गुड़ और दूध से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, इसलिए इनका ज्यादा से ज्याद प्रयोग करें। लहसुन को दूध में उबालकर खीर पाक बनाएं। इसका आर्गेनिक सल्फर वायरस और बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है। तुलसी के कच्चे जूस में शहद मिलाकर लेने से भी यह सप्ताहभर में शरीर की इम्यूनिटी बढ़कर स्वाइन फ्लू से पूरा बचाव करता है।

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