मेरठ: कृषि भूमि के मुआवजा निर्धारण में हुआ खुला बंदरबाट...अर्जित भूमि 250 रुपये मीटर की दर से खरीदकर 5280 रुपये का पाया मुआवजा

मेरठ: कृषि भूमि के मुआवजा निर्धारण में हुआ खुला बंदरबाट...अर्जित भूमि 250 रुपये मीटर की दर से खरीदकर 5280 रुपये का पाया मुआवजा

मेरठ। नए भूमि अर्जन अधिनियम-2013 में पुश्तैनी किसानों के हक व अधिकार से संबंधित कृषि भूमि के मुआवजे निर्धारन में खुला बंदरबाट हुआ है। केंद्रीय धन के प्रतिकर का खुला व्यवसायिककरण कर पुश्तैनी कृषकों को गरीब बना दिया गया और बिल्डर, प्रोपर्टी डीलर, शहरी व्यापारियों को राजनैतिक संरक्षण व उच्च पहुंच के द्वारा अमीर व अरबपति बनाया गया। उक्त आरोप गढ़ रोड स्थित पत्रकारवार्ता में एडवोकेट भागमल सिंह व चौधरी अब्दुल वहाब ने लगाए। बताया कि खुली रिश्वत व घोर भ्रष्टाचार की शिकायत 25 नवम्बर 2017 व 9 जनवरी को कमिश्नर के सामने रखी गई और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई। पत्रकारवार्ता में आरोप लगाते हुए एडवोकेट भागमल सिंह व चौधरी अब्दुल वहाब ने बताया कि यह कार्य तत्कालीन एडीएम एलए डीपी श्रीवास्तव और उनके घनिष्ठ प्रधान लिपिक वकील चंद शर्मा, नीरज तायल, सुधीर शर्मा व अनुराग शर्मा द्वारा किया गया। इस घोटाले में राष्ट्रीय राजमार्ग परिवहन मंत्रालय के तत्कालीन सचिव ब्रहमदत्त शर्मा भी शामिल रहे। जिन्होंने अवैध कमाई से अपार संपत्ति खरीदी। बताया जिनके बैनामे की कॉपी कमिश्नर को दी जा चुकी है। बताया कि दिल्ली-डासना-मेरठ एक्सप्रेस वे व हाईवे नम्बर 235 की अर्जित भूमि 250 से 300 रुपये मीटर की दर से खरीदकर 5280 रुपये का मुआवजा अपर जिलाधिकारी व प्रोजेक्ट डायरेक्टर हाईवे की सेटिंग से उठाया गया। इसी तरह डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर की अर्जित भूमि मुआवजा माफियाओं द्वारा बिल्डर जय प्रकाश एसोसिएशन की बैनामी पाटर्नरशिप से भूमि खरीदी गई और अरबों रुपयों का लाभ प्राप्त किया गया। इस तरह इन लोगों ने जनपद के लगभग डेढ़ दर्जन गांवों के किसानों की साथ खुली लूट की। ग्राम परतापुर में तो कानून, संविधान, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों को ताक रख दिया गया। कमिश्नर व कलक्ट्रेट द्वारा निर्धारित 1100 रुपये वर्ग मीटर की दर को बढ़ाकर अपर जिलाधिकारी भूमि अर्जन डीपी श्रीवास्तव व उनकी मंडली ने प्रोपर्टी डीलर व बिल्डर्स के अनुसार अर्जित खसरों का 11954 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजा दिया। जिसकी शिकायत कमिश्नर से की गई। मांग की गई कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए और भ्रष्टाचारियों को भूमि अर्जन कार्यालय से हटाकर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जाए।

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