मेरठ: चन्द्रग्रहण पर 150 साल बाद दुर्लभ नजारा

मेरठ: चन्द्रग्रहण पर 150 साल बाद दुर्लभ नजारा

मेरठ। साल का पहला और सबसे बड़ा चंद्रग्रहण बुधवार को हुआ। इस बार आसमान में चांद ने एक दुर्लभ नजारा पेश किया जो करीब 150 साल बाद हुआ। आम दिनों के मुकाबले चांद काफी बड़ा दिखाई दिया।
आंशिक चंद्रग्रहण शाम को 5 बजकर 18 मिनट से शुरू हुआ और जो रात 8 बजकर 41 मिनट तक चला। जबकि पूर्ण चंद्रग्रहण शाम 6 से साढ़े 7 बजे के बीच में रहा। ऐसे वक्त में अपने खान पान में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बता दें कि सूतक लगने से पहले ही लोगों को अचार, दूध, दही समेत दूसरे खाद्य पदार्थों में तुलसी डालना चाहिए या फिर कुश का उपयोग भी कर सकते है। वहीं सूखे हुए खाद्य पदार्थों में तुलसी या कुश डालने की जरूरत नहीं है।
अगर पुराणों की माने तो चंद्रग्रहण के वक्त के चांद को दूषित माना गया है। जिसकी छाया अशुद्ध होती है। ऐसा कहा जाता है कि कुंवारे लोग इस चांद से दूर ही रहे, क्योंकि इसे देखना अशुभ होता है। वहीं शास्त्रों में चांद को शीतल यानी की ठंडा भी कहा गया है। बता दें कि ग्रहण के सूतक तथा ग्रहण काल में हमें खुद के कल्याणकारी इच्छाओं की पूर्ति के लिए स्नान, ध्यान, दान, मंत्र, स्तोत्र-पाठ, इत्यादि कार्यो का सम्पादन करना चाहिए। ग्रहण के वक्त मन और बुद्धि पर नियंत्रण रखना चाहिए।

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