मेरठ: एमडीए की नाक के नीचे हुआ घोटाला, खुद को गरीब बताकर ले लिए मकान, फिर दे दिए किराए पर

मेरठ: एमडीए की नाक के नीचे हुआ घोटाला, खुद को गरीब बताकर ले लिए मकान, फिर दे दिए किराए पर

मेरठ। गरीबी से तंग व सिर पर छत बनवाने में असमर्थ बहुत से आश्रयहीनों को सरकार द्वारा छत तो नसीब हो गई। लेकिन इनमें कुछ ऐसे भी थे जिन्हें इसकी दरकार नहीं थीउन्होंने वह घर बेच दिया है। जांच में ऐसे 34 आवंटियों के नाम सामने आ चुके हैं, अब इनका आवंटन निरस्त किया जाएगा।
गौरतलब है कि वर्षो पहले शहर के आश्रयहीनों को मकान देने की योजना बनाई गई और एमडीए की हर योजनाओं में ऐसे लोगों के लिए मकान बनवाए गए। आश्रयहीनों का एमडीए द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर उन्हें मकान आवंटित भी कर दिए गए। ऐसे मकान सरकार की लगभग सभी आवासीय योजनाओं में बनाए गए थे। ये मकान इन आश्रयहीनों को मामूली कीमत पर सब्सिडी के आधार पर दिए गए थे। इसमें यह भी शर्त थी कि इन मकानों को कभी बेचा नहीं जा सकता। यही नहीं, इन मकानों को किराए पर भी नहीं दिया जा सकता था। लेकिन हाल ही में हुए खुलासे में एमडीए अफसरों को आश्रयहीन आवासों की सच्चाई का पता चला तो उनके पांव तले से जमीन खिसक गई। जांच की तो पता चला कि सरकार से मिले काफी मकान किराए पर दे दिए गए हैं। इसके बाद एमडीए वीसी के निर्देश पर शताब्दीनगर योजना में सत्यापन किया गया। जिसमें 34 आश्रयहीन आवंटी ऐसे पाए गए, जिन्होंने मकान बेच दिया है। खास बात है कि इन मकानों को बेचा ही नहीं गया बल्कि जिसे बेचा गया था उसके नाम ट्रांसफर भी कर दिया गया। खास बात यह है कि यह सारी प्रक्रिया एमडीए ऑफिस से ही कराई गई, जो कि विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिली भगत के बिना संभव ही नहीं है।
एमडीए वीसी के अनुसार इन सभी का आवंटनों को निरस्त किया जाएगा तथा साथ ही अन्य योजनाओं में भी जांच कराई जा रही है। नामांतरण कैसे हुए और कौन-कौन इसमें शामिल रहे इसकी भी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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