मेरठ: परीक्षा में केंद्रों पर हुई नकल तो केंद्र व्यवस्थापक पर एफआईआर

मेरठ: परीक्षा में केंद्रों पर हुई नकल तो केंद्र व्यवस्थापक पर एफआईआर

मेरठ। पिछले काफी समय से उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षा माखौल बनी हुई थी। नकल के ठेकों के लिए बदनाम हो रहे बोर्ड से वहीं बच्चे इसकी परीक्षा पास करते दिखाई सुनाई दे रहे थे जो अन्य कहीं किसी बोर्ड में पास नहीं हो पा रहे थे। हैरानी की बात इसके बाद भी इस बोर्ड परीक्षा में देश में सर्वाधिक परीक्षार्थी सम्मिलित होते थे। योगी सरकार आते ही बोर्ड की दशा-दिशा सुधारने की ओर प्रयास होने लगे।इसी कडी में योगी सरकार ने बोर्ड परीक्षा को पारदर्शी बनाने की ओर एक और ठोस कदम उठाया है। नए आदेश के तहत परीक्षा के दौरान अगर परीक्षा केंद्रों पर नकल होती पकड़ी गई तो उसके लिए केंद्र व्यवस्थापक के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी। सरकार के इस आदेश से सभी केंद्र व्यवस्थापकों के मन में भय बैठ गया है। माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट ने इसका विरोध किया है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष और एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि यह सरकार की तानाशाही है। इसका दोषी सिर्फ केंद्र व्यवस्थापकों को ही क्यों माना जाए।
यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान अगर छात्र या कक्ष में सामूहिक नकल पकड़ी जाती है तो उसमें सर्वप्रथम कार्रवाई कक्ष निरीक्षक के खिलाफ होगी। डीआईओएस सरदार सिंह ने बताया कि सरकार की तरफ से नकल विरोधी अधिनियम लागू किया गया है। जिसके तहत सभी को निर्देश जारी किए गए हैं कि केंद्र व्यवस्थापकों के खिलाफ भी एफआईआर कराने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि अब केंद्र व्यवस्थापक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेगे। परीक्षा होने पर उनकी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में पूरे केंद्र की जिम्मेदारी उनके ऊपर ही होती है। परीक्षा कक्ष में अगर छात्र नकल करते पकड़ा जाता है तो इसकी जिम्मेदारी सर्वप्रथम कक्ष निरीक्षक की होगी और उसके बाद केंद्र व्यवस्थापकों की। आखिर छात्र के पास किताब या पर्ची पहुंची कैसे नकल के लिए। आखिरकार परीक्षा केंद्र पर केंद्र व्यवस्थापक ही पूरी नजर रखता है।

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