मेरठ: साहित्य वही जो दिल को छुए: रामनाईक...मेरठ पहुंचे राज्यपाल रामनाईक ने किया लिटरेरी फेस्टिवल का शुभारंभ

मेरठ: साहित्य वही जो दिल को छुए: रामनाईक...मेरठ पहुंचे राज्यपाल रामनाईक ने किया लिटरेरी फेस्टिवल का शुभारंभ

मेरठ। साहित्य वही है जो पाठक के दिल को छुए। यदि साहित्य ऐसा नहीं कर रहा तो वह साहित्य नहीं हो सकता। मेरठ का साहित्य पूरे देश और दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत है। हिंदी को लेकर मन में कोई कुंठा नही होनी चाहिए। देश के पहले स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुवात मेरठ से हुई। आइआइएमटी यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल के शुभारंभ में यह बात उत्तर-प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कही। गंगानगर पी पॉकेट स्थित आईआईएमटी इंजीनिरिंग स्कूल में पहुंचे राज्यपाल नाईक ने कहा कि हिंदी सभी भाषाओं की बड़ी बहन है। ऐसे में हिंदी साहित्य को चाहने वालों ककी यह जिम्मेदारी है कि वह अन्य भाषाओं तक उसे पहुंचाए और उन्हें समृद्ध बनाए। रामनाइक ने कहा कि संस्कृत को समझे बिना संस्कृति को नही समझा जा सकता। ऐसे में हमे संस्कृत को विस्तार देना होगा। इस फेस्टिवल में अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा और कश्मीर में 1947 के बाद से जारी संघर्ष पर भी मंथन होना चाहिए। साहित्यकारों को इस पर विचार करना चाहिए। संबोधन के बाद राज्यपाल ने फेस्टिवल में घूमकर विभिन्न हिन्दी साहित्य की किताबे देखी और उनकी उपलब्धिया साझा की। इस मौके पर आईआईएमटी के चेयरमैन योगेश मोहन गुप्ता, विशाल शर्मा, मानव शर्मा आदि भी उपस्थित रहे।

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