मेरठ संभलकर खाए चुनावी मिठाई...सरधना व हस्तिनापुर के दर्जनभर गांवों में बन रही है सिंथेटिक मिठाई

मेरठ संभलकर खाए चुनावी मिठाई...सरधना व हस्तिनापुर के दर्जनभर गांवों में बन रही है सिंथेटिक मिठाई

मेरठ। मिलावटखोर अपने व्यापार का बहाना तलाश ही लेते हैं। निकाय चुनाव नजदीक आते ही मिलावटी मिठाइयों का बाजार सज गया है। चुनाव में मिठाई की बढ़ती मांग को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सिंथेटिक मिठाई बनाने की भट्टियां चढ़ गई है।
मवाना क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर, डाहर और सरधना कस्बे के कई गांवों में सिंथेटिक मिठाई बनाई जा रही है। चुनावी मौसम में इन गांवों में रात-दिन सिंथेटिक मिठाई की भटठीयां चल रही हैं। ये गांव डाहर, जसड़, सुल्तानपुर और जैनपुर हैं। इसके अलावा सरधना क्षेत्र के कुछ गांव हैं। यहां की बनी मिठाई पूरे जिले में सप्लाई की जा रही है। इतना ही नहीं यहां की बनी हुई सिंथेटिक मिठाई अन्य राज्यों को भी सप्लाई होती है। वहीं, जानकारों की माने तो इस तरह की मिठाइयां ज्यादा खाने से लीवर और किडनी भी खराब हो सकती है, क्योंकि जिस दूध या मावे से इन मिठाइयों का निर्माण किया जा रहा है। उसे यूरिया और अन्य केमिकल की मदद से तैयार किया जाता है।
मिठाई का ऑर्डर देने वालों में चेयरमैन और सभासद के प्रत्याशी भी हैं। नगर पालिका, नगर पंचायत पद के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने भी आर्डर दिया हुआ है। बाजार में आमतौर पर सफेद रसगुल्ला 500 से 400 रुपये किग्रा तक हैं। लेकिन, यहां ये सिंथेटिक रसगुल्ले की कीमत मात्र 80 रुपये किग्रा है। इन गांवों में सिंथेटिक मिठाई बनाने वालों को गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, मुरादाबाद, शामली, हापुड़, बुलंदशहर आदि जगहों से ऑर्डर मिल रहे हैं।
अभी कुछ दिन पहले चुनाव प्रचार के दौरान बसपा प्रत्याशी द्वारा रसगुल्ले बांटे जाने पर केस दर्ज किया जा चुका है। एसओ गंगानगर आशुतोष कुमार ने बताया कि मिठाई का सेंपल फूड इंस्पेक्टर से करवा दिया गया है। जांच के बाद सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कैप्शन- चुनाव को देखते हुए बन रही सिंथेटिक मिठाई

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