मेरठ: कपड़ा फैक्ट्री में लगी आग से करोड़ों का नुकसान

मेरठ। कपड़ा फैक्ट्री में लगी भीषण से इलाके अफरा-तफरी मच गई। कई पड़ौसी आग की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। सूचना से डेढ़ घंटे देरी से पहुंची दमकल विभाग की टीम को आग पर काबू पाने के लिए भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा, एक के बाद एक पहुंची दमकल की आधा दर्जन गाडिय़ों ने कई घंटो की मेहनत की और आग पर तो काबू पाया। लेकिन फैक्ट्री का एक भी हिस्सा सही सलामत बचाने में नाकाम रही।
सुबह होने तक पूरी फैक्ट्री राख में तब्दील हो गई। फैक्ट्री मालिक ने लगभग एक करोड़ का नुकसान होने की बात कही है।
सरधना के मोहल्ला धरमपुरा निवासी हाजी अकरम अंसारी ने कालंद रोड पर बिजली घर के सामने व चौधरी चिल्ड मिल्क प्लांट के पीछे असलम टेक्सटाईल्स के नाम से कपड़ा फैक्ट्री चला रखी थी। रात में लगभग दो बजे शोर्ट सर्किट होने से आग लग गई। फैक्ट्री में काम कर रहे कर्मचारियों ने आग बुझाने का प्रयास किया। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। कर्मचारियों ने अकरम अंसारी को आग लग जाने की जानकारी दी जिसके बाद मोहल्ले के सैकड़ो लोग उधर दौड़े और आग पर काबू पाने का प्रयास किया। इसी के साथ पुलिस कंट्रोल रूम व फायर ब्रिगेड विभाग को घटना से अवगत कराया गया। सूचना से डेढ़ घंटे देरी से पहुंची दमकल विभाग की टीम ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया। आग को काबू से बाहर देख आधा दर्जन फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों को बुलाया गया। तब जाकर सुबह आठ बजे तक आग पर काबू पाया गया लेकिन तबतक फैक्ट्री राख और खण्डर में तब्दील हो चुकी थी। आग ने फैक्ट्री के लेंटर व दीवारों को भी ध्वस्त कर दिया। फैक्ट्री मालिक अकरम अंसारी ने बताया की आग से 32 पावरलूम मशीने, आधा दर्जन तानी के चरखे, आधा दर्जन बैंडर, 500 से अधिक धागे के बोरे व भारी मात्रा में तैयार कपड़ा जलकर राख हो गया। साथ ही फैक्ट्री पूरी तरह ध्वस्त हो गई जिसके चलते लगभग एक करोड़ का नुकसान हुआ है। इस घटना बाद उसका परिवार पूरी तरह सड़क पर आ गया है।
आग की लपटों को देख फैक्ट्री के निकट रह रहे लोगों में हड़कंप मच गया आग की लपटों ने कई पड़ोसियों के घरों को अपनी चपेट में लेने का प्रयास किया। पड़ौसी हनीफ अंसारी के घर की छत पर रखे पानी के टैंक को भी बिघला दिया। घर के बाहर लगे बिजली के मीटर व दरवाजे अपनी चपेट में ले लिया। अकरम अंसारी के बराबर में शेखर पुत्र अब्दुल रहमान कपडा फैक्ट्री है जिसे मुश्किल से बचाया जा सका।
बतादे कि इतनी बड़ी फैक्ट्री में आग पर काबू पाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया था। समरसेबल के अलावा पानी स्टॉक के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। समरसेबल था लेकिन पाईप नहीं था, आग बुझाने का कोई भी यंत्र न होने के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ है। गनीमत रही की माल का नुकसान है जान का नहीं।

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