मेरठ: गन्ने पर गरमाई सियासत, भाव और मिलों के एरिया पर निगाहें

मेरठ: गन्ने पर गरमाई सियासत, भाव और मिलों के एरिया पर निगाहें

मेरठ। गन्ने के भाव और मिलों के केंद्रों को लेकर बनाई गई नई पॉलिसी को लेकर सियासत गरमा गई है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति(एआईकेएससीसी) की किसान मुक्ति यात्रा दोपहर 12 बजे कमिश्नरी पर पहुंची। उधर रालोद 12 को कमिश्नरी पर महापंचायत करेगा। रालोद नेता जयंत चौधरी मेरठ और बिजनौर में कार्यकर्ताओं से मिले। मध्य प्रदेश के किसान आंदोलन के बाद कई संगठनों द्वारा चंपारण से 2 अक्टूबर को शुरू की गई किसान मुक्ति यात्रा के साथ किसान नेता वीएम सिंह, स्वाभिमान शेतकारी संगठन के सांसद राजू शेट्टी, स्वराज अभियान के योगेन्द्र यादव, बेतूल के पूर्व विधायक डा. सुनील और भाकियू नेता पहुंचेंगे। भारतीय किसान आन्दोलन के कुलदीप त्यागी ने बताया कि विभिन्न संगठनों से जुड़े किसान नेता इसमें शामिल होंगे। उधर रालोद भी किसानों के इस मुद्दे पर सक्रिय हो गया है। 12 तारीख को कमिश्नरी पर महापंचायत के लिए पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी मेरठ और बागपत जिले में कई जगह गए। सुबह 11 बजे जयंत चौधरी चिरौड़ी गांव के उस किसान परिवार से मिलने पहुंचे जिसके एक नौजवान की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। बिजनौर के नगीना में भी जयंत पूर्व सांसद मुंशी रामपाल के घर पहुंचे और मेरठ के खजूरी में नरेन्द्र खजूरी के घर पहुंचे। इन दोनों नेताओं के भतीजों की हाल ही में मृत्यु हो गई थी। जयंत ने बिजनौर और मेरठ दौरे के वक्त कार्यकर्ताओं से 12 की कमिश्नरी महापंचायत के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन भी किया। उधर जयंत मंगलवार को बस्ती जिले के हरैया में गन्ने के मुद्दे पर ही किसानों की सभा करेंगे।
चीनी मिल मालिकों के उलट किसान गन्ने का दाम कम से कम 370 रुपये कुंतल करने की मांग कर रहे हैं। किसानों का तर्क है कि गन्ने पर 350 के पार तो लागत ही आ रही है। भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कलंजरी कहते हैं कि चुनाव के पहले पीएम मोदी ने फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम देने का वादा किया था इसलिए उन्हें उम्मीद है कि प्रदेश सरकार गन्ने पर कम से कम 50 रुपये कुंतल बढ़ाएगी।
काम्पैक्ट केन एरिया पॉलिसी और भाव अहम सवाल
प्रदेश सरकार के लिए गन्ना किसानों, मिल मालिकों और चीनी उपभोक्ताओं के बीच संतुलन बनाना चुनौती है। माना जा रहा है कि दिवाली के पहले प्रदेश सरकार गन्ने का भाव घोषित कर देगी। अगर गन्ने का दाम न बढ़ा तो इससे किसानों में नाराजगी होगी और अगर ज्यादा बढ़ा तो शुगर मिल लॉबी अपने संकट का हवाला देकर दबाव बढ़ाएगी। शुगर मिल लॉबी चीनी आयात पर शुल्क बढ़ाने की भी डिमांड कर रही हैं। दूसरी तरफ काम्पैक्ट केन पॉलिसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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