मेरठ: शहीदों की याद में सोगवारों ने छुर्रियों से किया मातम

मेरठ: शहीदों की याद में सोगवारों ने छुर्रियों से किया मातम

मेरठ। मोहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना है, जो चांद के हिसाब से चलता है। इस्लामी साल का यह महीना दुनिया भर के मुस्लिमों के लिए ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। मुस्लिम समाज में सुन्नी और शिया दोनों मिलकर मोहर्रम मनाते हैं। हालांकि दोनों के तरीकों में फर्क होता है। इस्लाम धर्म में रमजान के बाद मोहर्रम के महीने को दूसरा सबसे पाक महीना माना जाता है। बताया जाता है कि 1400 साल पहले 10 अक्टूबर को हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों के साथ बहुत बेदर्दी से कर्बला इराक के बयाबान में जालिम यजीदी फौज ने शहीद कर दिया था। इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम मनाया जाता है। यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम (शोक) का दिन है। शिया समुदाय के लोग मोहर्रम के महीने की पहली तारीख से 10 तारीख तक काले कपड़े पहनकर खूनी मातम करते है। जबकि सुन्नी समुदाय के लोग दस दिनों तक रोजा रखने के साथ इबादत करते है, इमाम हुसैन के साथ कर्बला में शहीद हुए लोगों को याद किया जाता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ की जाती है। 61 हिजरी में शहीद हुए लोगों को एक तरह से यह श्रद्धांजलि देने का तरीका है। रविवार को मुहर्रम की दसवीं तारीख पर इमाम हुसैन व उनके साथ करबला के मैदान में हुए शहीदों को याद करते हुए सोगवारों ने छुर्रियों से मातम करते हुए खुद को लहूलुहान कर लिया। इस दौरान हुई मजलिस में मौलानाओं ने तकरीर करते हुए हुसैन कि शहादत का किस्सा बयान किया। क्षेत्र के ग्राम खिर्वा जलालपुर में रविवार दोपहर मजलिस के दौरान मौलाना रजा हैदर ने वाक्याते करबला सुनाते हुए यजीद के जुल्मों व हजरत इमाम हुसैन के साथ उनके 72 साथियों की शहादत का बयान किया। करबला के शहीदों का तजकरा और घोड़ा बरामद होने का बयान सुनते ही सोगवारों में कोहराम मच गया। सोगवारों ने छुर्रियां लगी जंजीरों से मातम करते हुए खुद को लहूलुहान कर लिया। कई सोगवारों ने दहकते हुए अंगारों पर मातम किया। इमाम बारगाहों से निकलकर रास्तों पर मातम करते हुए सोगवारों को देखकर ख्वातीन (महिलाएं) जोर-जोर से रोने लगीं। बारगाहों से जुलूस के साथ जंजीरों से मातम कर खुद को लहूलुहान करते हुए सोगवार हुसैनी चौक पहुंचे। जहां पर सामूहिक रूप से मातम किया गया, मातम में युवाओं के साथ छोटे बच्चों में भी खुद को लहूलुहान कर यादे-हुसैन में नजराना ए अकीदत पेश करने का जज्बा रहा। हुसैनी चौक पर मातम व खिताब के बाद ताजियाती जुलूस निकाला गया और ताजियों को करबला में दफन किया गया। खिर्वा में रोजे-आशूरा का मातम देखने के लिये दूर दराज से हजारों लोग पहुंचे। इसके अलावा रविवार शाम सरधना नगर में भी विभिन्न स्थानों से ताजियों के जुलूस निकाले गये। जिनमें शामिल सोगवारों ने मातम करते हुए खुद को लहूलुहान किया। इस अवसर पर पूर्व चेयरमेन निजाम अंसारी, आगा एनुद्दीन शाह, असद ग़ालिब, डा. इरफ़ान, मंजूर मालिक आदि मुख्य रूप से शामिल रहे.। सुरक्षा के मद्देनजऱ उपजिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश यादव, सीओ भीम कुमार गौतम, एसओ धर्मेन्द्र सिंह राठोर मय फ़ोर्स के साथ भ्रमण करते रहे और लोगों से सहयोग की अपील करते नजऱ आए।

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