मेरठ:जान जोखम में डालकर स्कूल जाते है बच्चे

मेरठ:जान जोखम में डालकर स्कूल जाते है बच्चे

मेरठ। सरधना के मौहल्ला इस्लामाबाद में बाहरी छोर पर प्राईमरी विद्यालय है। विद्यालय में पहुँचने के लिए बच्चों को एक ऐसे रास्ते से होकर गुज़ारना पड़ रहा है जो कभी भी किसी को भी मौत के मुंह में धकेल सकता है। बच्चे व शिक्षक इस खतरनाक रास्ते से निकल कर आगे बढ़ते है तो वहां भी उन्हें भीषण गंदगी से जूझना पड़ता है। जहाँ हर समय संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना रहता है। किसी भी वक्त बड़ी बीमारी का शिकार हो सकते है। ऐसे हालात में उनकी समस्या का समाधान करने की जहमत कोई नहीं उठा रहा है। शायद किसी बड़े हादसे का इन्तजार है। वैसे भी हमारे यहाँ घटना के बाद ही सुरक्षा की सोची जाती है। स्कूल जाने वाले सबसे छोटे रास्ते पर कुछ दबंगों ने कब्ज़ा कर लिया है और रास्ता बंद हो गया है। दूसरे रास्ते पर बरसात के चलते दो तालाब मिल गए है और रास्ते को उन्होंने अपने कब्जे में ले लिया है। तीसरा रास्ता बहुत लम्बा है। इस रास्ते से बच्चे स्कूल जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकते। अब हालत ये है की बच्चो व शिक्षकों को तालाबों के बीच के रास्ते से ही स्कूल जाना पड़ रहा है। जिसके चलते मात्र बड़े बच्चे ही स्कूल तक पहुँच पा रहे है वो भी अपनी जान को खतरे में डाल कर। जिस तालाब के बीच से उन्हें जाना पड रहा है वह काफी गहरा है। जैसे तैसे इस खतरे से भरे रास्ते को पार कर स्कूल तक पहुँचते है तो वहाँ उन्हें भीषण गंदगी का सामना करना पड़ता है। स्कूल में कोई सफाई कर्मी नहीं है जिसके चलते बच्चे व अध्यापक खुद ही सफाई करते है। इसके अलावा नगर पालिका नगर की गंदगी को स्कूल के निकट ही डलवा रही है जिसकी दुर्गन्ध उनका जीना मुहाल करती है। इसी के साथ तालाब में फैली गंदगी, यही बात ख़त्म नहीं होती आसपास के लोग छुट्टी के बाद अपने पशुओं को स्कूल में बांधते है और स्कूल खुलने से पहले खोलकर ले जाते है। इतना ही नहीं आस-पड़ोस के लोग जिनके घरों में शौचालय नहीं है वो वहा शौच करके जाते है। पशुओं के अवशेष भी स्कूल परिसर में पड़े मिलते है। रही सही कसर वहां घूमने वाले आवारा कुत्ते पूरी करते है। स्कूल परिसर में शराब की खाली बोतलें इस बात को पुष्ट कर देती है कि शाम होते ही असमाजिक तत्व व आवारा किस्म के लोग स्कूल परिसर को अपना अड्डा बना लेते है। उक्त समस्याओं सामना करते हुए बच्चे वहां पढऩे जाते है। यह बच्चे गरीब निर्धन परिवारों से है यहाँ आना इनकी मज़बूरी है। प्रधानाध्यापिका पुष्पा ठाकुर ने बताया विद्यालय में लगभग तीन सो बच्चों का पंजीकरण है, जब से स्कूल के रास्ते में जलभराव हुआ है तब से मात्र 50 से 60 के बीच ही बच्चे पढऩे आ रहे है। वह भी पहले स्कूल में फैली गंदगी को साफ़ करते है। उसके बाद बैठने की जगह बनाते है। यहाँ फैली गंदगी के चलते अक्सर बच्चे व शिक्षक संक्रामक रोगों की चपेट में आते रहते है। यहाँ हर समय जीवन खतरे में रहता है। उक्त सभी समस्याओं के संबंध में ग्राम प्रधान गुलशन प्रवीण को अवगत कराया जा चूका है। इसके अलावा उपजिलाधिकारी व बेसिक शिक्षाधिकारी को भी अवगत कराया जा चूका है। लेकिन आज तक किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। अक्सर स्कूल के ताले टूटे मिलते है कई बार चोरी भी हो चुकी है। रसोई तक में भी आसपास के लोग अपने पशुओं को बांधते है, जिसके चलते उन्हें बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को भी खुले आसमान के नीचे ही बनाना पड़ता है। स्कूल नहीं मौत का घर बना हुआ है न जाने कब कोई बच्चा तालाब की भेंट चढ़ जाए या फिर बीमारी की जद में आकर दम तोड़ दे। यहाँ तैनात सभी अध्यापक परेशान है लेकिन इनकी कोई भी सुनने वाला और समस्याओं का समाधान करने वाला कोई नहीं है।
इस संबन्ध में सरधना देहात की प्रधान गुलशन परवीन के पति सैय्यद मुन्तयाज अली ने बताया की सरधना देहात की ग्राम पंचायत के अंदर कई गांव आते है, जो अलग-अलग दिशा में है। कुल मिलाकर लगभग पच्चीस हजार की आबादी के लिए मात्र एक ही सफाई कर्मी है। सरधना देहात की ग्राम पंचायत में महरमती मीणा, अहमदाबाद, मानपुरी, नवाबगढ़ी, के अलावा सरधना में मोहल्ला जगमोहन नगर, मेरठ रोड, इस्लामाबाद, महाराणा प्रताप नगर, धर्मपुरी ईदगाह रोड नई बस्ती, लोक प्रिया रोड, आदि इलाके शामिल है। इतनी बड़ी आबादी की साफ़ सफाई जिम्मा मात्र एक सफाई कर्मी पर है। जिसके कारण एक इलाके में सफाईकर्मी का नंबर लम्बे समय में आता है। क्षेत्र में पडऩे वाले पांच सरकारी स्कूल भी है। मात्र एक सफाई कर्मी के कारण गंदगी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जलभराव के बारे में बताया की कुछ दबंगो ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर लिया है जिसके चलते इस्लामाबाद की निकासी का पानी नाले में नहीं जा रहा है।

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