हाईकोर्ट से स्टे लाने को छोड़ा पूर्व मंत्री का अवैध निर्माण

हाईकोर्ट से स्टे लाने को छोड़ा पूर्व मंत्री का अवैध निर्माण

मेरठ। शहर में अवैध अतिक्रमण करने वाले लोगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलन्द हैं। कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार के कड़े तेवरों के बावजूद भी मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूरे बेगमपुल पर अवैध निर्माणों की भरमार है, वहीं दबाव बनने पर अब पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के अवैध कॉम्पलैक्स को भी बिना गिराए छोड़ दिया।
बेगमपुल समेत पूरे शहर में पिछले दो दशकों में अवैध रूप से कई नामचीन शोरूम खड़े हो गए हैं। साड़ी, ज्वैलरी, रेडिमेड गारमेंट्स, आयुर्वेदिक दवाईयों के शोरूम से लेकर कई अवैध कॉम्पलैक्स कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे कई निर्माणों की सिलिंग और ध्वस्तीकरण से संबंधित फाइलें एमडीए की अल्मारियों में धूल फांक रहीं हैं।
एमडीए अध्यक्ष और कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ मोर्चा खोलने पर क्षेत्र की जनता को आस जगी कि शायद अब इन अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो। लेकिन पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर और बिल्डर दीपक कामरान के अवैध कॉम्पलैक्स में भी सिर्फ रस्म अदायगी कर एमडीए के अधिकारी वापस लौट गए। पिछले कई दिनों से बिल्डर की लेबर अवैध निर्माण हटाने के नाम पर सिर्फ वक्त काट कर रही है।
हाईकोर्ट से स्टे लाने को दिया वक्त
ऐसे मामलों को लेकर सच संस्था के अध्यक्ष व अधिवक्ता संदीप पहल का कहना है कि एमडीए के अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे शहर में अवैध निर्माण हो रहे हैं। इसके बाद अब पूर्व मंत्री के अवैध कॉम्पलैक्स को नहीं गिराकर प्राधिकरण अफसरों ने उसे वक्त दे दिया है। इस कारण वह हाईकोर्ट से स्टे लाने की कोशिश में है। प्राधिकरण का यह रवैया सही नहीं है। इस तरह की कार्यशैली से पूरा शहर अतिक्रिमण की जद में आ जायेगा।

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