मेरठ: मरीज ईलाज के लिए भटकते रहे इधर-उधर, हड़ताल पर रहे डॉक्टर

मेरठ। केन्द्र सरकार द्वारा एमसीआई के स्थान पर नेशनल मेडिकल कमीशन के गठन के विरोध में आईएमए के आह्वान पर मंगलवार को डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल का असर मेरठ में भी देखने को मिला। इस दौरान जहां शहर के 1200 डॉक्टर सुबह नौ से शाम पांच बजे तक हड़ताल पर रहे। वहीं ओपीडी और पैथलॉजी लैब पर ताला लटका रहा। डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मेडिकल से लेकर जिला अस्पताल और नर्सिंग होम्स में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों मे हाहाकार मचा रहा। मंगलवार की सुबह आईएमए के अध्यक्ष डा. मेघावी तोमर और सचिव डाण् सुशील गुप्ता के नेतृत्व में आईएमए हॉल से शहर के पचास से अधिक डॉक्टर दिल्ली में होने वाले अनशन में शामिल होने के लिए रवाना हुए। आईएमए में पंजीकृत 1200 सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर हड़ताल पर रहे। जिसके चलते मेडिकल और जिला अस्पताल की ओपीडी भी सूनी पड़ी रहीं। सरकारी अस्पताल ही नहींए बल्कि नर्सिंग होम्स में उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को भी निराश होकर वापस लौटना पड़ा। पैथलोजी लैब और रेडियोडाइग्नोस्टिक सेंटरो पर भी ताले लटके रहे। डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीज इलाज के लिए इधर से उधर भटकते नजर आए। बताते चलें कि केन्द्र सरकार द्वारा एमसीआई के स्थान पर एनएमसी बनाए जाने का डॉक्टर पुरजोर विरोध कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा होने से जहां मेडिकल कॉलेजों को सीटे भरने की आसानी से छूट मिल जाएगीए वहीं शिक्षा का स्तर भी गिरेगा। चिकित्सकों की भूमिका कम होने और एमएमसी में अधिकांश नॉन मेडिकोज टीम की भर्ती होने के कारण असंतुलन की स्थिती उत्पन्न हो सकती है।
झोलाछापों की हुई चांदी
डाक्टरों की हड़ताल के चलते शहर के प्रतिष्ठित डॉक्टरों के काम न करने के कारण मंगलवार को शहर से लेकर देहात तक गलियों में स्थित छोटे नर्सिंग होम और झोलाछापों की मौज रही। बड़े डॉक्टरों के क्लीनिकों और नर्सिंग होम में इलाज न मिलने पर मरीजों ने झोलाछापों और छोटे नर्सिंग होम का रूख किया तो उन्होंने भी मरीजों को चूना लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बड़े नर्सिंग होम में कम खर्चे में हो जाने वाले कामों के लिए भी मरीजों को छोटे नर्सिंगहोम और झोलाछापों को अच्छी खासी फीस चुकानी पड़ी।

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