यूपी सरकार को करारा झटका...हाईकोर्ट ने दिये सरकारी वकीलों की सूची दोबारा तैयार करने के निर्देश

यूपी सरकार को करारा झटका...हाईकोर्ट ने दिये सरकारी वकीलों की सूची दोबारा तैयार करने के निर्देश

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह से कहा है कि नवनियुक्त 201 सरकारी वकीलों की सूची पर विशेष गौर कर योग्यता एवं प्रतिभा तथा नियम कायदों को देखते हुए पूरी सूची को फिर से तैयार करें।
न्यायालय ने महाधिवक्ता पर भरोसा दिखाते हुए जिम्मेदारी दी है कि उच्च न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण अदालत में काम करने वाले सरकारी वकील बहुत योग्य ही नियुक्त किये जाने चाहिए। योगी सरकार में नियम कायदों को दरकिनार कर बनाये गए सरकारी वकीलों की सूची को लेकर काफी दिनों से उथल-पुथल की स्थिति चल रही थी। उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने इसी मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद नियुक्तियों से जुड़े गम्भीर सवाल खड़े किए थे। उच्च न्यायालय का मानना है कि हाईकोर्ट जैसे उच्च न्यायिक संस्थान में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में केवल योग्यता का ही मानक होना चाहिए। उच्च न्यायालय ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायलयों से जारी दिशा निर्देशों तथा सरकारी वकीलों की नियुक्ति से सम्बंधित नियम-कायदों को देखते हुए सरकारी वकीलों की सूची तैयार की जानी चाहिए। अदालत ने एल आर मैनुअल और उच्चतम न्यायालय के अनेक निर्णयों का हवाला देते हुए महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह पर भरोसा जताते हुए कहा कि फिर से काबिल और अनुभवी योग्य सरकारी वकील बनाये जायें। अदालत ने कहा कि लगता है कि उच्च न्यायालय की सरकारी वकीलों की सूची तैयार करते समय ठीक से महाधिवक्ता की राय नहीं ली गई नहीं तो इलाहाबाद और लखनऊ उच्च न्यायालय में यह नौबत न आती। न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायमूर्ति दया शंकर त्रिपाठी की खंडपीठ ने याची महेंद्र सिंह पंवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बुलबुल गोदियाल द्वारा दायर याचिका पर आज यह आदेश दिये। याची की वकील का तर्क था कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में सरकारी वकीलों की सूची बनाते समय नियम कायदों को दरकिनार कर दिया है। यह भी कहा कि अनेक ऐसे वकीलों की नियुक्ति कर दी, जिन्होंने उच्च न्यायालय में कभी प्रैक्टिस ही नहीं की है और न उनके पास उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस का ए ओ आर नंबर है। आरोप लगाया गया कि अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता के 21 पदों, स्थाई अधिवक्ता के 49 पदों तथा अन्य के 127 पदों पर की गई नियुक्तियां एल आर मैन्युअल तथा सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के द्वारा बनाए गए नियम कायदों के विपरीत है। मांग की गई थी कि 201 वकीलों की पूरी सूची निरस्त होने योग्य है। याची की ओर से सुनवाई के समय कहा गया कि उच्च न्यायालय में सरकारी वकीलों की नियुक्ति नियम-कायदों से होनी चाहिए और इसमें विशेष पारदर्शिता भी रहनी चाहिए। अदालत ने कहा कि महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह और मुख्य स्थाई अधिवक्ता रमेश पाण्डेय जैसे अनेक योग्य लोगों की नियुक्ति कर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है, लेकिन हाल में जारी 2०1 सरकारी वकीलों की सूची में बहुत गड़बड़ी दिखाई दे रही है। न्यायालय ने यहां तक कहा कि कानून के अनुसार पूरी 2०1 सरकारी वकीलों की सूची खारिज करने के पर्याप्त आधार हैं, लेकिन महाधिवक्ता द्वारा भरोसा दिलाये जाने पर अदालत आगामी आठ अगस्त तक सूची रिवाइज करने की मोहलत दी है। अदालत ने प्रमुख सचिव न्याय का प्रभार देख रहे एल आर को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर हलफनामा देकर अदालत को की गई करवाई से अवगत कराएं।

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