खुद की नादानी, हो गये बे-पानी : जब रिश्ता टूटा तो पानी सूखा

खुद की नादानी, हो गये बे-पानी : जब रिश्ता टूटा तो पानी सूखा


लखनऊ। जल संकट उत्पन्न होने की प्रक्रिया तबसे शुरू हुई, जबसे हमने जल से खुद का रिश्ता भूल गये। पहले कुंआ की खुदाई से पहले वहां भूमि की पूजा होती थी, जब खोदाई होते-होते जल स्रोत फूट पड़ता था तो पूरा गांव जयकारों से गूंज उठता था, लेकिन अब तो न वह पूजा रही और न ही उस जल से मित्रता, हम सिर्फ एक वस्तु मानकर उसका उपभोग करने तक सिमित रह गये।

इस अंधाधुंध उपभोग के बीच हमने यह भी नहीं सोचा कि जब हम इसकी फिक्र नहीं करेंगे तो आखिर कब तक हमारी जिंदगी को बचाए रखेगा। यही कारण है कि दुनिया में चार अरब लोग एक माह के लिए भीषण जल संकट से गुजरते हैं, इनमें सर्वाधिक भारत के लोग हैं।

नहीं चेते तो गंगा, नर्मदा बनकर रह जाएंगी इतिहास

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार यदि यही स्थिति रही तो गंगा, नर्मदा, सुर्पणखा जैसी नदियां इतिहास की विषय बनकर रह जाएंगी। भारत में बहुत सी नदियों (कावेरी, सिंध नदी का जो हिस्सा हिंदुस्तान में है, कृष्णा, माही, पेनार, साबरमती और ऊपरी पश्चिमी क्षेत्र में बहने वाली नदियां) में पानी कम हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में हर आठ सेकेंड में एक व्यक्ति जल जनित रोग से मौत का शिकार हो जाता है। आने वाले एक दशक में इसके दोगुना होने की संभावना है। भारत में आर्सेनिक से प्रभावित 10 राज्यों के 68 जिले हैं, फ्लोराइड से 20 राज्यों के 276, नाइट्रेट से 21 राज्यों के 387, आयरन से 24 राज्यों के 297 जिले प्रभावित हैं। आगे इसके बढ़ने की ही संभावना है।

पानी को वेदों में कहा गया है 'आपो' देवता, ऋग्वेद के चार सूक्त हैं समर्पित यही कारण है कि हमारे धर्म ग्रंथों में इसकी महत्ता को समझा गया। श्रग्वेद में इसे 'आपो' देवता कहा गया। ऋग्वेद' के पूरे चार सूक्त 'आपो देवता' के लिए समर्पित हैं। यजुर्वेद प्रथम अध्याय जैसे यह सूर्यलोक,मेघ के वध के लिए,जल को स्वीकार करता है, जैसे जल,वायु को स्वीकार करते हैं, वैसे ही हे मनुष्यों! तुम लोग उन जल औषधि-रसों को शुद्ध करने के लिए, मेघ के शीघ्र- वेग में,लौकिक पदार्थों का अभिसिंचन करने वाले,जल को स्वीकार करो और जैसे वे जल शुद्ध होते हैं, वैसे ही तुम भी शुद्ध हो जाओ।

एक स्थान पर शुद्ध मिलीं थी गंगा

आज हम उसी जल की शुद्धता को भूल गये हैं। शहरों का कचरा जीवन दायिनी नदियों में प्रवाहित हो रहा है, जिस गंगा और यमुना में स्नान कर खुद के मुक्ति की कामना करते हैं, वहीं आज हमारे द्वारा फैलाई गंदगी के कारण कराह रही हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपने ताजा अध्ययन में पाया है कि जिन 39 स्थानों से होकर गंगा नदी गुजरती है उनमें से सिर्फ हरिद्वार में गंगा साफ हैं।

यमुना खुद को जिंदा रखने के लिए कर रही संघर्ष

15 वर्षों से यमुना के जल को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए जागरूकता पर काम करने वाले मनोज मिश्र का कहना है कि यमुना नदी प्रदूषण के कारण खुद को जिंदा रखने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि यमुना की पीड़ा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दो प्रतिशत हिस्से में 76 प्रतिशत प्रदूषण समाया हुआ है। कई हिस्सों में तो यमुना नौ माह तक सूखी रहती हैं।


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