खजाने के लिये घर में 50 फीट कर दी खुदाई

खजाने के लिये घर में 50 फीट कर दी खुदाई


हमीरपुर। यूपी के हमीरपुर जिला मुख्यालय में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के पास रोड किनारे जमीनी खजाने के चक्कर में एक शख्स ने अपने घर की गैलरी में 50 फीट गहरा बड़ा गड्ढा खोद डाला। पिछले 6 महीने से खुदाई कर रहा यह शख्स रविवार को उसी गड्ढे में बुरी तरह फंस गया। घटना की सूचना पर पुलिस प्रशासन रेस्क्यू आपरेशन चलाकर 3 घंटे में गहरे खड्ड से युवक को बाहर निकालकर पुलिस ने अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया है। युवक नशे में था।
संदीप साहू (40) पुत्र स्व.मधुसूदन साहू निवासी सुभाष बाजार हमीरपुर चार भाईयों में सबसे बड़ा है जो कभी बालीबाल का प्लेयर था। उसके पिता जाने माने अधिवक्ता थे। चार भाईयों में गुड्डन साहू की शादी हो चुकी है वहीं बाकी तीन भाईयों की शादी नहीं हुयी है। गुड्डन साहू बालू माफिया सत्यदेव दीक्षित के यहां मुनीम है। संदीप साहू कोई काम नहीं करता है। उसके साथ मां और भाई अखिलेश रहते हैं।
बताते हैं कि किसी तांत्रिक छह महीना पहले संदीप के घर आया था, जिसने देखते ही कहा था कि इस घर में जमीन के अंदर खजाना छिपा है। तांत्रिक ने घर के मेन गेट के अंदर से करीब दस फीट लम्बी गैलरी के अंदर जमीनी खजाना छिपे होने की बात बताई तो संदीप दंग रह गया।
बताते हैं कि संदीप हर रोज रात में पड़ोसियों के सो जाने के बाद गैलरी की खुदाई करता था। हालांकि उसके तीनों भाईयों ने मना किया था। मगर नशे में धुत्त संदीप नहीं माना। इस काम में उसकी मां लक्ष्मी साथ दे रही थी। 6 महीने की खुदाई के बाद 50 फीट गहरा गड्डा हो गया।
बीती शनिवार रात को संदीप ने खुदाई कर रहा था, उसी दौरान वह गड्ढे में फंस गया। दीवालों की मिट्टी भी धंस गई। मिट्टी के मलबे में वह उसका आधा शरीर दब गया तो संदीप चिल्ला पड़ा। मदद के लिये पड़ोसी आये मगर गहरा गड्ढा देख सभी पीछे हट गये। घटना की सूचना पाते ही दमकल विभाग के सिपाही मौके पर पहुंचे। कोतवाली भी सीओ के साथ मौके पर क्रेन लेकर पहुंच गये है। चार घंटे बीतने के बाद भी 50 फीट गहरे गड्ढे से उसे निकालने में पुलिस के पसीना छूट गए। रेस्क्यू आपरेशन के कारण हाइवे में जाम लगा है।
लम्बी सीढ़ी लगाकर होती थी खुदाई
पड़ोसियों ने बताया कि जमीनी खजाना के लिये छह माह से खुदाई हो रही थी। इसके लिये बीस फीट लम्बी दो सीढ़ी की प्रयोग की गई है। संदीप के भाई गुड्डन व मनोज का कहना है कि हम लोग बराबर भाई को मना करते थे खुदाई न करो मगर उसने किसी की बात नहीं सुनी।

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