सामूहिक हत्याकांड: अशोक चंदेल ने राजनीति में 22 साल में कई बार पाला बदला

सामूहिक हत्याकांड: अशोक चंदेल ने राजनीति में 22 साल में कई बार पाला बदला



- अपना वजूद बचाने के लिए समय-समय पर कई दलों में गए

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में सामूहिक हत्याकांड में फंसे भाजपा के सदर विधायक अशोक सिंह चंदेल ने पिछले 22 सालों में कई बार पाला बदला है। उन्होंने सामूहिक हत्याकांड के दो साल बाद बसपा के टिकट से हमीरपुर-महोबा संसदीय सीट के चुनाव में किस्मत आजमायी। जातीय समीकरणों के कारण अशोक सिंह चंदेल भारी मतों से निर्वाचित हुए थे। उन्हें चुनाव के समय जेल भी जाना पड़ा था।

1980 में कानपुर महानगर के किदवई नगर से राजनीति करने आये अशोक सिंह चंदेल ने चौधरी चरण सिंह की पार्टी, जनता एस के टिकट से चुनाव लड़ा था। हालांकि हमीरपुर विधानसभा सीट पर उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार प्रताप नारायण दुबे से पराजित होना पड़ा था। उन्हें 20549 मत मिले थे। वर्ष 1985 में चंदेल ने द.म.कि.पा. ज्वाइन कर कांग्रेस उम्मीदवार जगदीश नारायण शर्मा को टक्कर देने के लिए यहां की सीट से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें 24,662 मत मिले। इसके बाद 1989 में अशोक सिंह चंदेल ने निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में किस्मत आजमायी। वह पहली बार विधायक बने। उन्हें 30 हजार 813 मत मिले थे।

1991 के विधानसभा चुनाव में 19,126 मत पाकर वह बसपा उम्मीदवार से पराजित हो गये थे। 1993 के चुनाव में चंदेल ने जनता दल से चुनाव लड़ा, जिस पर 42 हजार 882 मत पाकर उन्होंने जीत का परचम फहराया था। वर्ष 1996 में बसपा उम्मीदवार से चंदेल पराजित हो गये थे। उन्हें 19 हजार 909 मत मिले थे। वर्ष 2012 में अशोक सिंह चंदेल ने पाला बदला और पीस पार्टी से चुनाव मैदान में आये लेकिन 17 हजार मत ही उन्हें मिल सके। पांच लोगों की सामूहिक हत्या के बाद अशोक सिंह चंदेल ने 1999 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट से चुनाव लड़ा, जिस पर उन्हें सहानुभूति पर 2 लाख 17 हजार 732 मत मिले। वह यहां से सांसद भी निर्वाचित हो गये लेकिन 2004 के आम चुनाव में उन्हें पराजित होना पड़ा।

इसके बाद वर्ष 2009 के आम चुनाव में अशोक सिंह चंदेल ने सांसद बनने के लिए फिर बसपा छोड़ी और सपा के टिकट से चुनावी महासमर में उन्होंने किस्मत आजमायी लेकिन वह बसपा उम्मीदवार विजय बहादुर सिंह से पराजित हो गये थे। इससे पूर्व वह सदर से वर्ष 2007 में विधानसभा का चुनाव फिर लड़े, जिस पर बसपा उम्मीदवार को पराजित कर यहां की सीट पर कब्जा किया था। उन्हें 43 हजार 887 मत मिले थे। अशोक सिंह चंदेल ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से ऐन वक्त पहले सपा छोड़ी और भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर वह सदर विधानसभा का चुनाव लड़े और भारी मतों से जीत दर्ज करायी।

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