इटावा: कभी साइकिल पर 2 पैसा टैक्स लेती थी नगर पालिका

इटावा: कभी साइकिल पर 2 पैसा टैक्स लेती थी नगर पालिका

इटावा। निकाय चुनाव आते ही पुरानी यादें एक बार फिर से ताजा होने लगी हैं। इन्ही यादों में एक नगर पालिका का साइकिल पर टैक्स लेना है। असल में नगर पालिका 2 पैसा टैक्स के बलबूते पर अपनी योजनाओं को संचालित किये हुई थी, लेकिन आज के परिवेश में नगर पालिका की आय के साधन अब तो काफी बढ़ गए हैं,पर पहले यह साधन काफी सीमित हुआ करते थे।
1963 में नगर पालिका की आय का एक बड़ा साधन साइकिलों पर लगने वाला टैक्स भी हुआ करता था। उस समय साइकिल पर एक प्लेट लगाई जाती थी, जिसका शुल्क दो पैसे लिया जाता था । प्रति साइकिल मिलने वाला है पैसा भी उस समय पालिका की प्रमुख आय का बड़ा साधन था ।
नगर निकाय चुनाव में इटावा नगर पालिका में 40 सभासद चुने जाएंगे । नगर पालिका का यह स्वरूप वर्ष 1953 में अस्तित्व में आया था। 01 दिसम्बर 1953 को देवी दयाल दुबे नगर पालिका इटावा के पहले चेयरमैन बने थे। उस समय इटावा नगर पालिका में वार्डों की संख्या मात्र छह हुआ करती थी, बाद में इस संख्या में बढ़ोत्तरी हुई। अब नए परिसीमन में इटावा नगर पालिका परिषद में 40 वार्ड हो गए हैं।
वर्ष 1953 से 2017 तक 64 वर्षों का लंबा सफर नगर पालिका इटावा ने तय किया है । इस दौरान चुनाव की पद्धति भी बदल गई है और चुनाव के तरीकों में काफी परिवर्तन आया है । पहले सभासदों के माध्यम से चेयरमैन का चुनाव किया जाता था और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से ही सभासद चेयरमैन को पद से हटा भी देते थे। यह सिलसिला 1953 से शुरू होकर 1970 तक चला ।
1977 में नगर पालिका इटावा में चुनाव नहीं हुआ और प्रशासन की नियुक्ति कर दी गई। इसके बाद 12 वर्षों तक प्रशासक नगरपालिका को चलाते रहे। डीएम ने कभी एसडीएम तो कभी सिटी मजिस्ट्रेट को प्रशासक नियुक्त किया गया ।
1989 में ही सभासदों ने चेयरमैन का चुनाव किया। उस समय नगर पालिका में वार्ड बढ़ गए थे, तब जहीर अहमद अंसारी चेयरमैन चुने गए थे लेकिन उस समय भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद 1995 में नगरपालिका के चुनाव कराए गए तब तक काफी बदलाव हो चुका था। सभासदों की संख्या इस नए परिसीमन से बढ़कर 36 हो गई थी । 2017 के चुनाव के लिए सभासद संख्या 40 हो गई है ।
शहर के लाइन पर का क्षेत्र पहले नगर पालिका में शामिल नहीं था। वहां सभासद के चुनाव नहीं होते थे उस समय तक इस क्षेत्र को कस्बा इटावा कहा जाता था और वहां चुनाव प्रधान के कराए जाते थे। वर्ष 1995 के नए परिसीमन के साथ नगरपालिका के चुनाव कराए गए। इसमें लाइनपार क्षेत्र को भी नगर पालिका में शामिल किया गया। तब पहली बार नगर पालिका के लाइन पार क्षेत्र में चार बार बनाए गए।
नगर पालिका की आय के साधन अब तो काफी बढ़ गए हैं पर पहले यह साधन काफी सीमित हुआ करते थे। 1963 में नगर पालिका की आय का एक बड़ा साधन साइकिलों पर लगने वाला टैक्स भी हुआ करता था, उस समय साइकिल पर एक प्लेट लगाई जाती थी जिसका शुल्क दो पैसे लिया जाता था। प्रति साइकिल मिलने वाला पैसा भी उस समय पालिका की प्रमुख आय का बड़ा साधन था।

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