रेलवे एक साल बाद भी नहीं ढूंढ सका पुखरायां ट्रेन हादसे का कारण

रेलवे एक साल बाद भी नहीं ढूंढ सका पुखरायां ट्रेन हादसे का कारण


कानपुर। इंदौर पटना एक्सप्रेस बीते साल 20 नवम्बर को पुखरायां कस्बे के पटेल चौक के पास भीषण दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। जिसमें सैकड़ों यात्रियों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद रेलवे की जांच कमेटी अभी तक हादसे के कारणों का पता नहीं लगा सकी। तो वहीं पुखरायां के लोगों को आज भी वह मौतों का मंजर नहीं भुला पा रहे हैं।
बीते साल 20 नवंबर की सुबह करीब पौने तीन बजे इतिहास की वह सुबह बनी, जिसे कस्बे के लोग कभी भुला नहीं पा रहे। हर तरफ चीत्कार और बिखरे पड़े शवों का मंजर कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस घटना को पूरा एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी यहीं लगता है कि यह घटना कल की है। आज ही के दिन पुखरायां के पटेल चौक के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी और ट्रेन के 14 डिब्बे बेपटरी हो गए थे। जिस समय हादसा हुआ था उस समय ट्रेन 107 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी। इस हादसे में 150 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई थी और दो सैकड़ा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। लेकिन रेलवे एक साल बाद भी अभी तक इस भीषण हादसे के कारणों का पता नहीं लगा पाया।
ठंडे बस्ते में पड़ी है आचार्या की जांच रिपोर्ट
हादसे के बाद रेलवे ने तेज तर्राट कोलकाता के संरक्षा आयुक्त पीके आचार्या को जांच कमेटी का चेयरमैन बनाया। उन्होंने कई बार दौरे किये, कभी सिमी आतंकियों का नाम सामने आया तो कभी आईएसआईएस का। तो वहीं कभी यह कहा गया कि सर्दियों के चलते पटरी चटक गई थी, जिससे यह हादसा हुआ। लेकिन रेलवे अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका। ऐसे में अब देखना यह होगा कि क्या जांच रिपोर्ट हमेशा की तरह यह भी ठंढे़ बस्ते में डाल दी जाएगी। वहीं, जब रेलवे के अधिकारियों से इस संबंध में पूछा गया तो कोई भी ऑन रिकार्ड कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
150 यात्रियों की गई थी जान
पुखरायां रेलवे स्टेशन से 20 नवंबर 2016 रविवार की तड़के इंदौर और राजेन्द्र नगर पटना के बीच चलने वाली पटना एक्सप्रेस ट्रेन ने जैसे ही पुखरायां स्टेशन के सिग्नल पार किया, अचानक तेज धमाके के साथ ट्रेन ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। इस घटना में 14 डिब्बे बेपटरी हो गए थे, जिसमें नौ डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए थे और एक दूसरे से चिपक गए थे। इस हादसे में 150 यात्रियों की मौत हो गयी थी। राहत कार्य सुबह से ही शुरू हो गया था और 30 घंटे चले राहत कार्य के बाद कहीं जाकर सभी शवों को निकाला जा सका। वहीं गंभीर रूप से घायल 200 यात्रियों को आस-पास के अस्पतालों में या फिर कानपुर भेजा गया।
इस कार्य में 108 व 102 एम्बुलेंस के चालकों ने रात दिन एक करके सभी घायलों को समुचित स्थानों पर पहुंचाया, जिससे घायल यात्रियों की जान बच सकी। वहीं पुखरायां के नागरिकों का भी अभूतपूर्व सहयोग रहा, जिससे जो बन पड़ा लोगों ने न रात देखी और न दिन देखा अपना काम काज छोड़कर यात्रियों के साथ किया और उनको सुरक्षित स्थानों पर भिजवाने में सहयोग किया। प्रशासन ने भी एक पांव पर खड़े होकर घायल यात्रियों के साथ-साथ हादसे में बच गए भयभीत यात्रियों को भी उनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाने में पूरा सहयोग किया था। हादसे के बाद राहत बचाव कार्य में जुटे रहे घाटमपुर कस्बे के अनिल सचान, राहुल द्विवेदी, विवेक कटियार, अजय अग्निहोत्री आदि ने बताया कि वह मौतों का मंजर कभी नहीं भुला पाएंगे।
नहीं लग रहे एलएचबी कोच
रेलवे में हादसों को रोकने के लिए बनी अनिल काकोदकर समिति ने स्पष्ट कहा था कि वर्तमान में लगे जर्मन तकनीक के आईसीएफ कोच को पूरी तरह से हटा दिया जाना चाहिये। समिति ने रिपोर्ट में कहा था कि यह कोच रेल दुर्घटना होने पर एक दूसरे के ऊपर चढ़ जाते है। जिससे हादसे का मंजर और वीभत्स हो जाता है। इसकी जगह एलएचबी कोच (लिंक हॉफमन बुश) लगाये जायें। बताया गया था कि इन कोचों के जरिये ट्रेन को 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा सकता है। साथ ही अगर ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है तो सभी कोच अलग-अलग हो जाएंगे, जिससे हादसे में नुकसान की संभावना कम रहेगी। लेकिन अभी तक रेलवे कुछ ही ट्रेनों में इन कोचों को लगा सका है।

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