कानपुर के आईआईटी के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बरसात की तकनीक खोज निकाली...उत्तर प्रदेश में शीघ्र होने लगेंगी कृत्रिम बरसात

कानपुर के आईआईटी के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बरसात की तकनीक खोज निकाली...उत्तर प्रदेश में शीघ्र होने लगेंगी कृत्रिम बरसात

बुलन्दशहर। उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि कानपुर के आईआईटी के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बरसात की तकनीक खोज निकाली है, जो चीन के मुकाबले सुगम एवं सस्ती होगी और इसे स्वीकृति के लिए शीघ्र ही केबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। सिंचाई विभाग के क्रिया कलापों की समीक्षा एवं भाजपा के अति पिछड़े कार्यकर्ताओं को संबोधित करने रविवार को यहा आये श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के बुन्देलखण्ड में पानी की बेहद कमी है, पानी की कमी दूर करने व फसलों की सिंचाई के लिए चीन से तकनीकी मदद लेने की बात तय हुई थी। इसके तहत एक हजार किमी के क्षेत्र में 5 मिनट की कृत्रिम वर्षा के लिए साढ़े दस करोड़ रूपये अदा करने की बात तय हुई थी, लेकिन चीन वायदे से मुकर गया। उन्होंने बताया कि अब कानपुर के आईआईटी वैज्ञानिकों ने कृत्रिम वर्षा की तकनीक खोज निकाली है जिस पर चीन के मुकाबले 5 करोड़ रूपया प्रति पांच मिनट कम खर्च आयेगा। इस प्रस्ताव पर शीघ्र ही मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ से बातचीत कर उनकी सहमति मिलने पर प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी वास्ते रखा जायेगा। श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में इजराल की तर्ज पर ड्रिप-स्प्रिंकलर योजना लागू की जा रही है जिससे 5० लाख किसान लाभांवित होंगे। उन्होंने बताया कि ड्रिप-स्प्रिंकलर पद्धति से फसल की सिंचाई पूरे विश्व में सिर्फ इजराइल में होती है। यह पद्धति उत्तर प्रदेश में भी लागू की जायेगा। इसके लिए किसानों को सरकार अनुदान देगी। लघु सिमांत किसानों को लागत का 9० प्रतिशत व बाकी को 8० प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। सिंचाई मंत्री ने कहा कि योगी सरकार गांव किसान के उत्थान विकास व समस्याओं के समाधान को सर्मपित है। 2०22 तक किसानों की आय दो गुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए सिंचाई विभाग ने गत 17 महीनों में अनेक क्रांतिकारी कार्य व योजनाएं बनायी हैं। उन्होंने कहा कि सरयू नहर, मध्य गंगा नहर, बांडसागर नहर व अर्जन सहायक परियोजना जिनकी शुरूआत पीएमकेएसवाई के तहत की गई थी। सपा सरकार में बन्द हो गईं इन चारों योजनाओं को योगी सरकार ने शुरू किया है। श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2०17-18 में इसके लिए 141० करोड़ व 2०18-19 में 421० करोड़ रूपये का प्रावधान कर दिसम्बर 2०19 तक योजनाओं को पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है, इसमें से बांड़सागर परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी कर चुके हैं। श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पानी की बेहद कमी है बुन्देलखण्ड के साथ विंध्याचांल के तीन जिले सर्वाधिक प्रभावित रहते हैं। पानी की कमी दूर करने के उद्देश्य से केन-वेतवा नदी जोड़ों परियोजना शुरू की है, जिसके तहत मध्यप्रदेश से वेतवा नदी को 2० प्रतिशत पानी मिलेगा। उन्होंने बताया कि नहरों का पानी सिंचाई वास्ते किसानों को सुगमतापुर्वक मिले इसके लिए सहभागी प्रबंधन व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की है, जिसके तहत राजवाहा, कुलावा और अल्पिका समिति गठित होंगी। प्रत्येक समिति में 11 सदस्य होंगे, जिसका चुनाव संबंधित क्षेत्र के किसान करेंगे। समिति गठन के बाद पानी का पूरा प्रबंध किसानों के हाथ में रहेगा, जो बारबंदी तय करेंगे। पूरे कार्य की देखरेख सिंचाई विभाग के जिम्मे होगी। श्री सिंह ने दावा किया कि समितियों के निर्वाचन का काम दिसम्बर 2०18 तक पूर्ण किया जायेगा। श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जाति, जिसमें लोधी राजपूत, मल्ला, निसाद, मथुरिया, केवट जैसे वर्ग शामिल हैं और जिनका कुल वोट प्रतिशत में 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी है इन सभी वर्गों को एकजुट करने के उद्देश्य से लखनऊ में अक्टूबर मास में अति पिछड़ा वर्ग सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का नागरिक अभिनन्दन भी किया जायेगा।

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