बागपत में मेसोपोटामिया की सभ्यता का मिला प्रमाण

बागपत में मेसोपोटामिया की सभ्यता का मिला प्रमाण

बागपत। बागपत में इतिहासकारों द्वारा खुदाई का काम बंद कर दिया गया है। कल्चर मनिस्ट्री के दखल के बाद खुदाई में निकला सामान दिल्ली लाल किले भेज दिया गया है। यहां खुदाई में मेसोपोटामिया सभ्यता के प्रमाण मिलने के बाद बागपत में इतिहासकारों का जमावडा लगना तय है। जल्द ही यहां पर वीआईपी गतिविधियों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
दरसल. बरनावा तथा सिनौली की खुदाई में काफी अहम चीजें मिली हैं। इसमें हजारों साल पुराना प्रतिहार सभ्यता का शवाधान केंद्र मिला है। ऐसे शवाधान केरल में पाए जाते हैं। इसमें इंसान के साथ पशुओं के कंकाल बरामद हुए हैं। मेसोपोटामिया की सभ्यता में ऐसे मृतक के साथ पशुओं को दफनाने का रिवाज था। जिसके बाद बागपत को इस सभयता से भी जोड़कर देखा जा रहा हैं।
खुदाई में इंसान के नर कंकाल के साथ स्वर्ण तथा खाने के सामान, घड़े आदि भी मिले हैं। इससे ताम्र युग की सभ्यता के अवशेष होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। इन सभी अवशेषों को लाल किले ले जाया गया है। यहां से इसे लैब में भेजकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जो चीजे निकली हैं, उससे इतिहासकारों में जिज्ञासा उमड़ गयी है। जिसके चलते काम को रोक दिया गया है और कल्चर मंत्रालय जल्द ही इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकता है। जिसके बाद यहां पर वीआईपी गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आधार बनाकर शोध एवं अनुसंधान कर रहे शहजाद राय शोध संस्थान के शोध निदेशकों की टीम ने उपस्थित शोधकर्ताओं को सिनौली सभ्यता के बारे में जानकारी दी। इनमें जिसमें वरिष्ठ इतिहासकार अमित राय जैन, डॉ. केके शर्मा, डॉ. अमित पाठक भी शामिल थे। इसे बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण शाखा द्वितीय लाल किला, भारतीय पुरातत्व संस्थान, नई दिल्ली ने यहां पर खुदाई का काम शुरू किया था।
15 फरवरी से शुरू किये गये इस खुदाई के काम में सैकड़ों लोग लगे हुए थे और अब तक काफी अहम चीजे उनको मिली हैं। चूंकि इस स्थान से मीडिया को दूर रखा गया था। इसलिए जो सामान मिले उनके बारे में सही जानकारी नहीं दी गयी और अब खुदाई में मिले सभी सामान को लाल किले भेज दिया गया है। फिलहाल काम रोक दिया गया है।

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