इलाहाबाद में कांवडियों की मांग, गंगा-यमुना में गिर रहे नाले हों बंद

इलाहाबाद में कांवडियों की मांग, गंगा-यमुना में गिर रहे नाले हों बंद

इलाहाबाद। श्रावण मास में भोलेनाथ की अारधना में लीन कांवडिये इलाहाबाद में पतित पाविनी गंगा यमुना के संगम को दूषित कर रहे नालों के उत्प्रवाह से खासे आहत हैं।
उन्होने सरकार और जिला प्रशासन ने नालों को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की है।
मोक्षदायिनी संगम नगरी में गंगा में कई नाले सीधे गिरते हैं जहां से कांवडिये जल भरकर अपने आराध्य देव भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।
मनौरी से संगम के बीच कई नाले गंगा में सीधे गिर कर गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं।
दारागंज घाट और दशाश्वमेध घाट का भी पानी नालों से प्रदूषित हो रहा है जहां से कांवरिये श्रावण मास में जल भर कर काशी, बिहार स्थित बाबा बैजनाथ धाम समेत शहर और आस-पास के शिवालयों में महादेव का जलाभिषेक करते हैं।
दारागंज स्थित दशाश्वमेध घाट पर गंगा जल भरने पहुंचे 25 कांवरियों का एक जत्थे ने घाट पर जमा गंदगी और नालों के उत्प्रवाह को लेकर जमकर बवाल किया।
उन्होंने कहा कि लों का गंदा पानी गंगा को प्रदूषित कर रहा है जिसे तत्काल बंद किया जाना चाहिये।
उन्होंने कहा कि गंगा में सीधे गिरते नाले श्रद्धालओं के आस्था पर चोट कर रही हैं।
करोडों रूपये खर्च करने के बद भी गंगा आज मैली की मैली है।
माघ मेले को छोडकर जल कम होने से श्रद्धालुओं के लिए डुबकी लगाना मुश्किल होता है।
कांवडिया मोहन लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने गंगा की सफाई के लिए बडी धूम-धाम से 2015 में नमामि गंगे परियोजना की शुरूआत की और इसके लिए कई हजार करोड रूपये के बजट का प्रावधान किया।
गंगा की सफाई पर धन लगातार कागजों पर खर्च होता गया जबकि हकीकत से इसका कोई लेना देना नही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की नमामि गंगे परियोजना का कोई असर नहीं दिखलाई पड रहा है।
गौरतलब है कि गंगा के किनारे गंगानगर, नेवादा, राजापरा, बेली गांव, मेंहदौरी, रसूलाबाद, गेाबिंदपुर, सलौरी, बधाडा, दारागंज क्षेत्रों में हजारों मकान बने हैं जिनका गंदा पानी नालों से गंगा में सीधे गिरता है।
माघ मेला और कुंभ मेले के दौरान साधु-संतों के शोर मचाने के बाद प्रशासन सचेत होता है और तब नालों की जांच की जाती है।
कम से कम 30 से अधिक नाले गंगा और यमुना में सीधे गिर रहे हैं।

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