योगी आदित्यनाथ का अधिकारियों को सख्त निर्देश...सुबह 9 बजे दफ्तर पहुंचें, नहीं तो होगी कड़ी कार्रवाई

योगी आदित्यनाथ का अधिकारियों को सख्त निर्देश...सुबह 9 बजे दफ्तर पहुंचें, नहीं तो होगी कड़ी कार्रवाई

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए समय पर दफ्तर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। योगी आदित्यनाथ ने सूबे के अधिकारियों, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों को हर हाल में सुबह 9 बजे तक दफ्तर पहुंचने को कहा है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि सभी अधिकारी तत्काल प्रभाव से इसका पालन करें और ऐसा नहीं होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यूपी सीएम कार्यालय के ट्विटर हैंडल से यह निर्देश ट्वीट किया गया है। बता दें कि इन दिनों योगी आदित्यनाथ पुलिस और प्रशासन से सख्ती से पेश आ रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने पुलिस प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के मुद्दे पर समीक्षा बैठक में अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई थी। उन्होंने कहा था कि वर्दी के नाम पर कलंक बन चुके पुलिसकर्मियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है। इसके अलावा उन्होंने लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं को रोक ना पाने के लिए भी अधिकारियों से कड़े सवाल पूछे थे।

सीएम योगी ने पूछा था, 'आप के आस-पास सारे संसाधन मौजूद हैं, पूरी छूट है और दावे के अनुसार आप सड़क पर ही रहते हैं फिर भी अपराध की घटनाएं क्यों हो रही हैं? अपराध होने के बाद भी आपका ऐक्शन क्यों नहीं दिखता। किसी घटना का जब मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है, उसके बाद ही आपका ऐक्शन क्यों दिखता है। मुख्यमंत्री ने जेलों को अपराधियों के आराम और अपराध संचालन का अड्डा बन जाने पर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने सचिवालय प्रशासन की समीक्षा बैठक के दौरान भ्रष्ट और नकारा अफसरों को चिह्नित कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के निर्देश थे। उन्होंने कहा था कि सरकार को उन अधिकारी-कर्मचारियों की जरूरत नहीं है, जो व्यवस्था के प्रति ईमानदार नहीं हैं। सीएम की बैठक के बाद ही ऐसे अफसरों की फाइलें खंगालना शुरू कर दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक, ऐसे 3० अफसरों को चिह्नित कर लिया गया है, जिन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। इसमें 17 समीक्षा अधिकारी, आठ अनुभाग अधिकारी, तीन अनुसचिव और दो उप सचिव शामिल हैं। इन सबके खिलाफ पूर्व में हुई जांचों, कार्रवाई और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का ब्योरा जुटाया जा रहा है, ताकि उन्हें सेवा से हटाने के पर्याप्त आधार मौजूद रहें। इससे पहले केंद्र सरकार ने भी 15 वरिष्ठ आईटी अधिकारियों को 'जबरन सेवानिवृत्त कर दिया था।

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