वाराणसी में 5500 अजन्मी बेटियों का श्राद्ध कर्म, भूर्ण हत्या के खिलाफ दिया संदेश

वाराणसी में 5500 अजन्मी बेटियों का श्राद्ध कर्म, भूर्ण हत्या के खिलाफ दिया संदेश

वाराणसीउत्तर प्रदेश में वाराणसी की सामाजिक संस्था 'आगम' ने यहां के ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर सोमवार को 5500 अजन्मी बेटियों को पिंडदान कर भूर्ण हत्या के खिलाफ देश-दुनिया को अनूठा संदेश दिया।

संस्था के संस्थापक सचिव डॉ संतोष ओझा ने बताया कि मां की कोख में मार दी गईँ बेटियों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान एवं जल तर्पण किया गया। बेटियों को बचाने के लिए अपने-अपने स्तर पर काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल हुए। श्राद्ध कर्म के बाद परंपरा के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराया गया।

उन्होंने बताया कि वह हर वर्ष पितृपक्ष के दौरान अजन्मी बेटियों का श्राद्ध करते हैं और अब तक 26000 बेटियों को पिंडदान कर चुके हैं। उन्हें लगता है कि इस आयोजन से समाज में बेटियों को मां की कोख मारने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने के प्रयासों को मदद मिलेगी।

आचार्य दिनेश शंकर दुबे की अगुवायी में ब्राह्मणों के एक दल ने 5500 बेटियों का एक-एक कर श्राद्ध कर्म कराया। श्री दुबे का कहना है मान्यतानुसार मृत्यु के बाद आत्मा भटकती रहती हैं, जो संबंधित परिवार के लिए शुभ नहीं माना जाता। वाराणसी में श्राद्ध कर्म के बाद मृत आत्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है और परिवार समाज में भी शांति रहती है।

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