छुट्टा पशु साल में गटक जाते हैं 29 करोड़ का भूसा

छुट्टा पशु साल में गटक जाते हैं 29 करोड़ का भूसा

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में छुट्टा जानवर (अन्ना पशु) एक साल में 28 करोड़ 8० लाख 9० हजार रुपये का भूसा गटक जाते है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. जय सिंह ने शनिवार को यहां बताया कि बुन्देलखंड में अन्ना पशुओं के नियंत्रण के लिये राज्य सरकार पूरा ध्यान दे रही है। इसके लिये जिले में 293 गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 264 पशुआश्रय स्थलों में जानवरों को रखा जा रहा है। इसमें राठ क्षेत्र के औता, जखेड़ी समेत चार पशुआश्रय स्थल बड़े बनाये जा रहे है जिसमें कम से कम सौ से लेकर दौ सौ पशु रखे जायेगे। सीवीओ ने बताया कि अन्ना पशुओं के लियेे 292 स्थानों में भूसा एकत्र किया गया है, जहां से गौशाला की देखरेक कर रहे लोग वहां से उठा ले जाते है।

उन्होंने बताया कि छुट्टा पशुओं की अग्रिम व्यवस्था के लिये सितम्बर 19 से अप्रैल 2०2० तक के भूसे के लिये शासन से 16 करोड़ 96लाख रुपये की धनराशि और मांगी गयी है। अन्ना पशु एक साल में लगभग 28 करोड़ 8० लाख 9० हजार का भूसा चट कर जाते है। पशु आश्रय स्थलों में पशुओ की संख्या घटती बढती रहती है। इसके पहले प्रशासन ने ग्राम प्रधानों व गांव के प्रतिष्ठित लोगों से चंदा के रुप में 33 लाख 75 हजार रुपये जमा करा चुकी है। अन्ना पशु 1523 शहरी क्षेत्रों में व 1०,7०6 ग्रामीण क्षेत्र के पशु आश्रय स्थलों पर बंद है। शासन एक जानवर के हिसाव से तीस रुपये का बजट देता है। चार माह पहले शासन स्तर पर हुयी बैठक में एक जानवर के लिये कम से कम सौ रुपये दिनभर के लिये आहार की आवश्यकता होती है।

पशु आश्रय स्थल पर काम करने वाला रामसिंह व गजराज ने बताया कि पशु आधा पेट भोजन भी नहीं पाता है यही कारण है कि तमाम पशु भूख से दम तोड़ देते है। किसान अपने जानवरों को छुट्टा छोडऩे में बाज नहीं आ रहा है। हालाकि कई पशु आश्रय स्थलों पर पशुओं के लिये पानी के पीने की व्यवस्था नहीं हो पायी है। देखरेख करने वाला व्यक्ति उन्हें गौशालओं से निकालकर पानी पिलाने के लिये तालाब ले जाता है। सीवीओ ने बताया कि कान में टैगिंग कर ऐसे पशु को अन्ना के रुप में चिहित कर लिया जा रहा। यदि इसके बाद कोई जानवर छुट्टा छोड़ता है तो पता कर ऐसे किसान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। वही किसान नेता महेश तिवारी का कहना है कि अन्ना पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कई जानवर बीमार है, लेकिन पशुआश्रय स्थलों पर उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे पशुधन का बहुत नुकसान हो रहा है।

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